कठुआ। शहर को पूरी तरह से स्वच्छ बनाने की मुहिम प्रभावी नहीं हो पा रही है। इसके चलते 21 वार्ड वाले शहर के कई हिस्से आज भी कचरे के ढेर के नीचे दबे नजर आते हैं।
करीब दो वर्ष पूर्व डोर-टू-डोर गार्बेज कलेक्शन के लिए शुरू की पहल के धराशायी होने के बाद नगर परिषद ने इस प्रयास को जारी रखने के लिए स्थानीय ठेकेदार के माध्यम से इसको आगे बढ़ाया लेकिन पिछले एक साल में चंद वार्डों से शुरू हुआ डोर-टू-डोर गार्बेज कलेक्शन कुछ चुनिंदा स्थानों से ही कचरा उठाने तक सीमित रह गया है।
शहर के वार्डों में आज भी कचरा हटाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। ऐसे में लोग अपने घरों से निकलने वाले कचरे को गली-मोहल्ले में खाली पड़े प्लाॅटों पर कचरा डाल रहे हैं। इससे जगह-जगह पर कचरे के ढेर नजर आना आम हो गया है। एक तरफ नगर परिषद सफाई होने का दावा करती है। वहीं कई स्थानों पर लग रहे कचरे के ढेर नगर परिषद के दावे को खोखले साबित कर रहे हैं। शहर के कई वार्डों में डस्टबिन न होने के कारण स्थानीय लोगों ने खाली प्लॉटों को कचरा पॉइंट बना लिया है। इसके कारण पनप रही गंदगी से लोगों के बीमार होने का खतरा बना रहता है।
दो टू डोर कचरा कलेक्शन ही शहर की समस्याओं का समाधान है लेकिन जब भी यह व्यवस्था शुरू की गई तो उसे प्रभावी बनाने के लिए न तो कोई प्रावधान बनाया गया और कचरा कलेक्शन की निगरानी के लिए व्यवस्था की गई। कई मोहल्लों में कचरा कलेक्शन के लिए आने वाली गाड़ी की पहुंच हर घर तक नहीं थी। इसके कारण लोगों को अपना कचरा खुद बाहर फेंकने के लिए आना पड़ा है। यही इस योजना के फेल होने का मुख्य कारण रहा है।
-बलबीर सिंह जसरोटिया, निवासी वार्ड नंबर 20
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शहर को कचरा मुक्त बनाने के लिए डोर-टू-डोर कलेक्शन तो शुरू हुआ लेकिन वह कब शुरू हुआ और कब बंद हो गया, पता नहीं चला। जब योजना शुरू की गई थी, तब भी कचरा कलेक्शन के लिए आने वाली गाड़ी का कोई निर्धारित समय नहीं होता था। इसके कारण लोग अपने घरों का कचरा बाहर फेंकने के लिए मजबूर थे। ऐसे में योजना का फेल होना का ही था क्योंकि न इसमें नगर परिषद में कभी कोई सुधार के लिए प्रयास किया और न ही कार्यपालक एजेंसी की ओर से समय सारिणी तय की गई।
-जीतराज, निवासी वार्ड नंबर 13