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Kathua News: हर माह 40 हजार तक चूजे तैयार करेगी कठुआ की हाईटेक हैचरी

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कठुआ में हाई टेक हैचरी के साथ तैयारी फीड मिल दिखाते ​अ​धिकारी संवाद
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जिले में प्रदेश की पहली हाईटेक हैचरी बनकर तैयार है। इस पर करीब चार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। हैचरी के लिए पेरेंट (मुर्गे-मुर्गियोंं) स्टॉक की पहली खेप एक माह के भीतर पहुंचने की उम्मीद है। इसके साथ ही चूजों के उत्पादन प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। अनुमान है कि इस हैचरी में हर महीने 30 से 40 हजार चूजे तैयार होंगे।
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हैचरी में ज्यादातर अहम काम मशीनों से होंगे। मसलन मुर्गियों को खिलाया जाने वाला आहार (फीड) तैयार करने के लिए मशीन लगाई गई है। यह मशीन प्रति घंटा एक टन फीड तैयार करेगी। इसका ट्रायल भी सफल रहा है। मुख्य पशुपालन अधिकारी डाॅ. युगल किशोर के अनुसार, यह परियोजना समग्र कृषि विकास कार्यक्रम (एचएडीपी) के तहत विकसित की गई है। हैचरी में पेरेंट स्टॉक से अंडे तैयार कर हैच (अंडे सेने की प्रक्रिया) किए जाएंगे। चूजे तैयार कर विभिन्न जिलों में भेजे जाएंगे। यह हैचरी न केवल अंडा और मांस उत्पादन में वृद्धि करेगी बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी।

बता दें कि जम्मू एयरपोर्ट के विस्तार के चलते जम्मू के बेलीचराना में स्थित पुरानी फीड मिल और हैचरी बंद हो चुकी है। इसलिए कठुआ की यह हैचरी पूरे जम्मू संभाग की जरूरतों को पूरा करने का केंद्र बनेगी। इससे फीड की सप्लाई भी संभाग के अन्य जिलों में की जा सकेगी।
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तीन नए पोल्ट्री शेड तैयार किए जाएंगे
वर्तमान में कठुआ में प्रति माह चार से पांच सौ चूजे ही तैयार होते हैं। नई हैचरी से 30 से 40 हजार चूजे तैयार किए जा सकेंगे। इससे मुर्गी पालन में रुझान रखने वाले किसानों और युवाओं को आकर्षित किया जा सकेगा। परियोजना के तहत तीन नए पोल्ट्री शेड तैयार किए जा रहे हैं।
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प्रदेश में अंडे-मीट की खपत
-पशुपालन विभाग के अनुसार सर्दी में हर माह 30 लाख मुर्गे-मुर्गियां लाई जाती हैं अन्य राज्यों से प्रदेश में।
-30 लाख से ज्यादा अंडे हर माह मंगवाए जाते हैं। स्थानीय स्तर पर भी आपूर्ति होती है।

-डेढ़ लाख से अधिक भेड़-बकरियां मांस के लिए अन्य राज्यों से लाई जाती हैं हर माह।

- 70 हजार मीट्रिक टन मीट की खपत होती है हर माह। इसमें से आधे की आपूर्ति अन्य राज्यों से।
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