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Kathua: लकड़ी तस्करों ने वन विभाग की गाड़ी को मारी टक्कर, चार सरकारी कर्मियों को कुचलने की कोशिश; एक घायल

Fri, 15 May 2026 01:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, कठुआ

सार

राजबाग क्षेत्र के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग पर वन विभाग की टीम के वाहन को कुचलने का प्रयास किया गया। तस्करों का पीछा कर रही विभागीय टीम के वाहन को लकड़ी से लदे ट्रक ने टक्कर मार दी।
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demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले में अवैध लकड़ी तस्करी में संलिप्त तस्करों की दबंगई बुधवार देर रात सामने आई। इसमें राजबाग क्षेत्र के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग पर वन विभाग की टीम के वाहन को कुचलने का प्रयास किया गया। तस्करों का पीछा कर रही विभागीय टीम के वाहन को लकड़ी से लदे ट्रक ने टक्कर मार दी।

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इसमें एक वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गया और तीन अन्य को मामूली चोटें आई हैं। वन विभाग की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। डिवीजन अधिकारी अंकित सिन्हा के अनुसार, वन विभाग की टीम को अवैध लकड़ी तस्करी की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने चडवाल नाके के दौरान तस्करी कर रहे कथित वाहन की शिनाख्त की गई।

इस दौरान नाके पर तैनात कर्मियों ने वाहन की रोकने की कोशिश की गई लेकिन वाहन मौके से फरार हो गए। इसके बाद एक स्विफ्ट कार में सवार चार वनकर्मियों ने राजबाग के छन्न आरोडियां में वाहन का पीछा कर रोकने की कोशिश की। दबंग तस्करों ने वनकर्मियों के वाहन को ही कुचलने का प्रयास किया। इसके बाद राजबाग रेंज की ओर से वन विभाग की रेंज कठुआ सहित पुलिस को अलर्ट कर दिया गया।
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अधिकारियों के अनुसार, घटना वीरवार की सुबह तीन बजे की है। जैसे ही वनकर्मियों ने अपने वाहन को आगे लगाकर उक्त वाहन को रोकने का प्रयास किया, तो तस्करों ने वाहन को टक्कर मार कर मौके से फरार हो गए। सूत्रों के अनुसार, वनविभाग की टीम ने लखनपुर स्थित मग्गर खड्ड के नजदीक उस वाहन को भी ट्रेस किया लेकिन वाहन अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए।

वनविभाग की टीम ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई। उक्त वाहन को तलाश की जा रही है। वन विभाग के अनुसार, अभी तक वाहन ने लखनपुर पार नहीं किया है और इस समय अज्ञात जगह पर खड़ा है। फिलहाल पुलिस और वन विभाग मामले की जांच में जुटे हैं और हमलावरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

वन संपदा की सुरक्षा निहत्थे वनकर्मियों के सहारे
छन्न अरोड़ियां के नजदीक हुई इस वारदात के बाद वन विभाग भी सवालों के घेरे में है। वनकर्मियों की तरफ से यह भी सवाल खड़ा किया जा रहा कि आखिर वन माफिया से मुकाबला करने के लिए वनकर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं दी जा रही। वनकर्मियों को रात को नाके पर निहत्थे खड़ा किया जा रहा है। जबकि कुछ का कहना है कि संबंधित विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए है कि इस तरह की घटना के दौरान वनकर्मियों को वाहन का पीछा कर अगले नाके पर तैनात वनकर्मियों और स्थानीय पुलिस को सूचित किया जाता है। लेकिन इस घटना में इस तरह की हिदायतें नहीं बरती गई हैं। फिलहाल वनविभाग मामले की जांच में जुटी हुई और आरोपी तस्करों को पकड़ने के लिए जगह-जगह पुलिस के साथ छापेमारी की जा रही है।

डीएफओ कठुआ अंकित सिन्हा ने बताया कि कठुआ में यह पहला बड़ा मामला है जब वाहन चालक ने कर्मचारी पर ही वाहन चढ़ाने की कोशिश की है। देश के अन्य राज्यों में संवेदनशील वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वनकर्मियों और अधिकारियों को हथियार उपलब्ध करवाए जाते हैं। जिले में भी हाल फिलहाल के मामलों को देखते हुए उच्च अधिकारियों को विशेष नाका वाहन सहित नाके में वाहन को नियंत्रित करने के लिए उपकरण उपलब्ध करवाने के संबंध में लिखा जाएगा।

काला है कठुआ में लकड़ी तस्करी का धंधा
जम्मू कश्मीर और पंजाब की सीमा पर स्थित कठुआ लकड़ी तस्करी का पिछले कुछ वर्षों में बड़ा ट्रांजिट प्वाइंट बनकर सामने आया है। वन विभाग और पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में दर्जनों ऐसे मामलों का भंडाफोड़ भी किया है। इससे साफ है कि लकड़ी माफिया का बड़ी सिंडीकेट प्रदेश और कठुआ जिले में सक्रिय है। खैर काटने की अनुमति सरकारी स्तर पर खुलने के बाद बड़े पैमाने पर लोगों के निजी खेतों से रातों रात खैर चोरी हुई है। वहीं सरकारी जमीनों पर लगे खैर भी तस्करों ने नहीं बक्शे। कटान के बाद यह खैर पंजाब की ओर लिए गए।

विभाग और पुलिस के नाकों के बीच कठुआ के चुनिंदा और बार्डर से सटे कुछ ठिकानों पर ऐसे वाहनों को पहले पहुंचाया जाता रहा है और फिर पंजाब रात के अंधेरे में निकाल दिया जाता रहा है। यह सब मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। यहीं से लकड़ी तस्करों के हौसले भी बुलंद हो गए। सूत्रों की मानें तो लकड़ी तस्करों ने हीरानगर सब डिवीजन में बड़े पैमाने पर वन संपदा की तबाही कर डाली है। अब जसरोटा फारेस्ट रेंज के अलावा महानपुर, बसोहली के इलाकों में भी बड़े पैमाने पर वन संपदा की अवैध कटाई की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

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