दस साल पहले 862...अब 958। कठुआ में बेटियों के हक में बदलती तस्वीर की यह बड़ी कहानी है। वर्ष 2014-15 में प्रति 1000 लड़कों पर 862 के लिंगानुपात वाला जिला अब 958 तक पहुंच गया है। एक दशक में 96 अंकों के इस सुधार के साथ कठुआ राष्ट्रीय औसत 2014-15 में 918 व 2024-25 में 929 से भी आगे निकल गया है।
वीरवार को जिला स्तरीय प्रशासनिक (डीएसी) बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार जिले में लिंगानुपात लगातार सुधार की ओर बढ़ा है। वर्ष 2015 में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के तहत देश के पहले 100 जिलों में कठुआ को शामिल किए जाने के बाद अभियान को गति मिली।
पहले ही वर्ष में आए उल्लेखनीय सुधार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 में अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात में सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि रीति-रिवाज के प्रति लोगों की सोच में बदलाव आया है। बेटी के जन्म पर उत्सव मनाया जाना बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच और सामाजिक स्वीकृति का संकेत है।
प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के कुलूड़ जिले में विशेष अभियान के तहत 175 से अधिक बाल विवाह रोकने की प्रशंसा के साथ जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले का भी विशेष उल्लेख किया था। तब उन्होंने कहा था कि समन्वय के तहत सभी विभागों को एकजुट कर प्रशासन ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहिम को आगे बढ़ाया। ग्राम पंचायतों और आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ अनाथ बच्चियों को गोद लेकर उनकी शिक्षा सुनिश्चित की गई। दस साल बाद अब इसके बेहतर नतीजे सामने आ रहे हैं।
सख्ती और जागरूकता से बदली तस्वीर
- भ्रूण हत्या रोकने को अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कसा शिकंजा
- सेहत के लिए बालिकाओं को बांटा जा रहा पौष्टिक आहार
- बेटियों की बेहतर शिक्षा के लिए किया जा रहा जागरूक
- गर्भवती महिलाओं की लगातार की जा रही मॉनीटरिंग
लिंगानुपात के बेहतर परिणाम स्वास्थ्य विभाग, प्रशासनिक इकाइयों और जागरूक समाज के सामूहिक प्रयासों का फल है। आज समाज बेटा-बेटी का भेद भुलाकर बालिकाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहा है। लगातार नतीजों में सुधार देखा जा रहा है।
-डॉ. विजय रैना, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कठुआ