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Kathua News: इस साल भी पर्यटकों की राह जोहते रहे ऑफबीट डेस्टिनेशन

Tue, 30 Dec 2025 01:30 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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सरथल में विंटर फे​स्टिवल के दौरान प्रस्तुति देते हुए स्थानीय कलाकारफाइल फोटो
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अलविदा 2025
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सरथल में विंटर फेस्टिवल की शुरुआत, ऐरवां, रावी, वरूण देव और सेवा खाद दरिया संगम पर पहली बार हुई महाआरती
- आतंकवाद ने बनी और लोहाई मल्हार में ऑफबीट पर्यटन को पहुंचाया है नुकसान
- चला में इस साल भी पैराग्लाइडिंग को लेकर कवायद सिरे नहीं चढ़ पाई
- इस साल आयोजित बसोहली उत्सव ने बांधा समां
- धार महानपुर, ढग्गर, सरथल, बसोहली, सियारा, चला धार, बदनोता, धार डुगनू, मछेडी, लोहाई और मल्हार में हैं पर्यटन की असीम संभावनाएं


कठुआ। लंबे समय से सरथल में देखा जा रहा विंटर फेस्टिवल का सपना 2025 में आखिरकार साकार हुआ। जनवरी महीने में हालांकि कम बर्फबारी ने पर्यटकों को निराश किया लेकिन विंटर फेस्टिवल की गर्मजोशी के साथ साल की शुरुआत हो गई।
ऐरवां धाम, रावी दरिया, वरूण देव और सेवा खाद दरिया संगम पर पहली बार हुईं महाआरती ने धार्मिक पर्यटन को पंख दिए। वहीं संस्कृति को भी बढ़ावा दिया। हालांकि आतंकवाद ग्रस्त जिले के पहाड़ी इलाकों के ऑफबीट पर्यटन स्थलों पर इस बार भी पर्यटकों की भीड़ उमड़ती नजर नहीं आई। खास तौर से लोहाई मल्हार और ढग्गर, सरथल पर हाल फिलहाल के वर्षां में पनपे आतंकवाद का ज्यादा असर देखने को मिला है।
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बसोहली और बिलावर कस्बे की दीवारें म्यूरल थ्रीडी पेंटिंग से सजी और कस्बों की खूबसूरती बढ़ाती नजर आईं। साल की शुरुआत में सरथल में हुए विंटर फेस्टिवल में इस साल रंगारंग कार्यक्रमों के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी ने पर्यटन को लेकर जिले की संभावनाओं पर काम करने का प्रशासन और सरकार को एक और मौका दिया। फरवरी महीने में जिले के नगरी तहसील में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ऐरवां में महाआरती की शुरूआत हुई। इसके बाद सेवा और खाद के बनी में संगम और फिर रावी दरिया में महाआरती ने लोगों को आस्था के साथ जोड़ दिया। वरूणदेव नगरी उज्ज पुल में भी पहली बार महाआरती का आयोजन हुआ। बसोहली उत्सव का तीसरा संस्करण इस ऐतिहासिक नगर में पर्यटन के खुलते पंख और बढ़ाकर चला गया। उपराज्यपाल ने इसके विस्तार और आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय पर्यटन कैलेंडर में शामिल किए जाने की संभावनओं का भी भरोसा दिलाया। अंतरराष्ट्रीय कला नगरी बसोहली में इस बार देश की अलग-अलग संस्कृतियों की झलक भी देखने को मिली। इस पर यहां की बिना पर्दे के एक दशक से अधिक पुरानी रामलीला ने चार चांद लगाए।
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उधर, कुछ वर्ष पूर्व जिले में पैराग्लाइडिंग को लेकर हुए ट्रायल के बाद भी इस साल एडवेंचर टूरिज्म के जिले में शुरूआत को पंख नहीं लग पाए।
धार महानपुर, ढग्गर, सरथल, बसोहली, सियारा, चला धार, बदनोता, धार डुगनू, मछेडी, लोहाई और मल्हार में हैं पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। जिन्हें लेकर वर्ष 2026 से और भी उम्मीदें बढ़ गई हैं।
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