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मानसिक स्वास्थ्य कोई विलासिता नहीं, जीवन की आवश्यकता है : डॉ राजेश चंदेल

Sat, 11 Oct 2025 02:06 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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कठुआ। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है। बदलती जीवनशैली, डिजिटल दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
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जीएमसी कठुआ में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. राजेश चंदेल कहते हैं कि मेंटल हेल्थ कोई विलासिता नहीं, बल्कि जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। जैसे हम शारीरिक बीमारी के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं, वैसे ही मानसिक असंतुलन के लिए भी मदद लेना जरूरी है। उन्होंने बताया कि एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर पांचवां युवा किसी न किसी मानसिक परेशानी से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य पर खुली चर्चा और काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें मानसिक स्वास्थ्य को लेकर शर्म या संकोच नहीं करना चाहिए। यह उतना ही सामान्य है जितना सर्दी-जुकाम। समाज को इसे स्वीकार करना होगा। जब समाज इसे स्वीकार करेगा, तभी व्यक्ति मदद लेने में सहज महसूस करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार, स्कूल और कार्यस्थल को मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और सहयोगी वातावरण बनाना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य पर खुली चर्चा, काउंसलिंग और हेल्पलाइन की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।
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खुद की करें देखभाल

नियमित दिनचर्या... सुबह जल्दी उठना, पर्याप्त नींद लेना और समय पर भोजन करना मानसिक स्थिरता को बढ़ाता है।
डिजिटल डिटॉक्स... दिन में कुछ घंटे मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं। इससे मानसिक थकान कम होती है।
मेडिटेशन और योग:.. रोजाना 10–15 मिनट ध्यान और योग करने से तनाव कम होता है और मन शांत रहता है।
खुलकर बात करें... अपने मन की बात किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें। अकेलेपन से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है संवाद।
रचनात्मक गतिविधियां ... पेंटिंग, लेखन, संगीत या कोई भी रचनात्मक कार्य मानसिक ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देता है।
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