अपनी मशरूम इकाई में काम करती रजनी देवी। स्रोत स्वयं
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1000 बैग क्षमता वाला मशरूम शेड स्थापित कर जैविक खेती के क्षेत्र में किया उल्लेखनीय कार्य
कठुआ। इच्छाशक्ति हो तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं। हीरानगर के जांडी गांव की रजनी देवी इसका जीता जागता उदाहरण है। उन्होंने खेतीबाड़ी को आजीविका का माध्यम बनाकर अपने नवाचारों से दूसरों को भी प्रेरित किया।
उन्होंने 1000 बैग क्षमता वाला मशरूम शेड स्थापित कर जैविक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। यह महिलाओं के लिए स्वरोजगार का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। इसके अतिरिक्त रजनी देवी वर्मी कंपोस्टिंग इकाई पर भी कार्य कर रही हैं। उन्होंने समग्र कृषि विकास योजना के तहत प्राप्त किया। यह इकाई जैविक खाद तैयार करने की दिशा में एक रचनात्मक प्रयास है, जो न केवल खेती को टिकाऊ बनाता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देता है। कृषि विभाग से मिलने वाले मार्गदर्शन और सहयोग के बल पर आगे बढ़ने वाली ग्रामीण महिलाओं में वह अग्रणी रही है।
कोट
रजनी देवी का यह कार्य ग्रामीण नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने यह दिखाया है कि सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त हो सकती हैं। साथ ही समाज को सकारात्मक दिशा दे सकती हैं। उनकी सफलता न सिर्फ स्थानीय महिलाओं को प्रेरणा देती है बल्कि प्रशासन को भी यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और योजनाओं की जानकारी से ग्रामीण महिलाएं बदलाव की अगुआ बन सकती हैं।
- पूजा अंदोत्रा, महिला सहायता ग्रुप की नोडल अधिकारी, कृषि विभाग