तकरीबन 900 मामले पहुंचे जिनमें मारपीट, उत्पीड़न और घरेलू विवाद प्रमुख
कठुआ। कानूनों के प्रति जागरूकता की कमी, आर्थिक संकट और नशे की लत जैसी सामाजिक चुनौतियां कठुआ की महिलाओं के जीवन को गहराई से प्रभावित कर रही हैं। घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं अब अपने दर्द को छुपाने के बजाय पुलिस और समाज कल्याण विभाग के दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं।
महिला थाना कठुआ में इस वर्ष तकरीबन 900 मामले पहुंचे हैं जिनमें मारपीट, उत्पीड़न और घरेलू विवाद प्रमुख हैं। इनमें से कई मामलों को सुलझाने के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर को भेजा गया। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर में मदद मांगने वाली महिलाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2022-23 में 82, 2023-24 में 99, 2024-25 में 151 और वर्तमान 2025-26 में अब तक 132 मामले सामने आए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए आवाज उठाने लगी हैं लेकिन साथ ही यह भी कि समाज में हिंसा की परछाई गहराती जा रही है।
दोनों संस्थानों में काउंसिलिंग के जरिए विवादों का निपटारा किया जा रहा है और लगभग 90 प्रतिशत मामलों में समाधान भी हुआ है। फिर भी, हर साल बढ़ते आंकड़े समाज के लिए चिंता का विषय हैं। महिला थाना प्रभारी अनुराधा चौधरी ने बताया कि उनकी प्राथमिकता परिवार को संगठित करना होती है। उन्होंने कहा कि अधिकतर मामलों में आर्थिक समस्या या पति की नशे की आदत के कारण महिलाएं हिंसा का शिकार होती हैं। कई मामलों में पति की ओर से खर्च न देना या मारपीट करना प्रमुख कारण रहा है। कठुआ का सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए संकट की घड़ी में एक सुरक्षित आश्रय स्थल बन चुका है। यहां उन्हें चिकित्सा, कानूनी, पुलिस और परामर्श सेवाएं एक ही छत के नीचे मिलती हैं। मानसिक एवं भावनात्मक परामर्श से महिलाएं आत्मविश्वास और सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। संवाद
कोट
महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक व अन्य कई तरह की सुविधा सखी वन स्टॉप सेंटर, कठुआ से दी जा रही हैं। इसके लिए केंद्र समय-समय पर कॉलेजों और समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है। यहां महिलाओं को कानूनी अधिकारों और घरेलू हिंसा कानूनों की जानकारी दी जाती है। इन प्रयासों से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्हें भरोसा मिला है कि वे अकेली नहीं हैं।
अंजिशा, केंद्र प्रशासक, सखी वन स्टॉप सेंटर कठुआ