विवादों में तबादले, जेकेटीएफ ने मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर किया जोरदार प्रदर्शन
कठुआ। अगस्त माह में जारी शिक्षक तबादले के आदेश को लेकर जम्मू-कश्मीर टीचर्स फोरम की जिला इकाई ने मंगलवार को जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई ऐसे शिक्षक भी हैं जिन्हें तबादलों के बाद फिर अपने तैनाती स्थल पर सार्वजनिक आदेश के बिना ही भेज दिया गया है।
फोरम के जिला अध्यक्ष रछपाल चौधरी ने बताया कि स्थानांतरण आदेश के बाद शिक्षकों को आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया था, जिसके तहत 200 से अधिक शिक्षकों ने संशोधन के लिए आवेदन प्रस्तुत किए। इनमें से केवल 75 से 80 मामलों को ही स्वीकृत किया गया, वह भी अस्पष्ट तरीके से। स्वीकृत मामलों में केवल आदेश संख्या और तिथि जारी की गई, जबकि कोई सार्वजनिक सूची उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने यह भी बताया कि 104 शिक्षकों की सूची निदेशालय जम्मू को भेजी गई, जबकि शेष 96 आवेदनों का कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। इससे संदेह उत्पन्न हो रहा है कि कुछ संशोधन अनौपचारिक माध्यमों से किए गए हैं। चौधरी ने आरोप लगाया कि जिन शिक्षकों के पास राजनीतिक या प्रशासनिक समर्थन नहीं है, उन्हें नजरअंदाज किया गया है।
फोरम के मुख्य प्रवक्ता सुभाष चंद्र शर्मा ने कहा कि एक समानांतर रेशनलाइजेशन सूची के तहत कई शिक्षकों को शहरी स्कूलों में स्थानांतरित किया गया है, जहां पहले से ही स्टाफ की अधिकता है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत योग्य शिक्षकों की मांगों को अनदेखा किया गया है। उन्होंने प्रशासन से स्थानांतरण प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने तबादला प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की और सभी प्रभावित शिक्षकों को न्याय दिलाने की अपील की। उन्होंने प्राइमरी स्कूल गुडा सूरजां के एक शिक्षक का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने समय पर आवेदन किया था, फिर भी उनका तबादला नहीं किया गया। प्रदर्शन में फोरम के जम्मू प्रांत उपाध्यक्ष गुरनाम सिंह सहित संजीव शर्मा, अनिल शर्मा, पंकज शर्मा, विनोद कुमार, कुलविंदर शर्मा, सोमदत्त, कमल कुमार, रमन भास्कर, अजय गुप्ता, मोहिंदर सिंह आदि शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में पारदर्शिता और न्याय की मांग की।
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हर बार विवादों में शिक्षा विभाग की तबादला नीति, भ्रष्टाचार के भी लग रहे गंभीर आरोप
शिक्षा विभाग की तबादला नीति को लेकर शिक्षक वर्ग में रोष पहली बार सामने नहीं आया है। पिछले एक दशक में कई बार तबादला नीति विवादों में रही है। विभाग पर भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं। जम्मू कश्मीर टीचर्स फोरम के सदस्यों ने साफ किया है कि तबादले बच्चों की सहूलियत के आधार पर होने चाहिए ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो। जबकि व्यक्ति विशेष को लाभ देने का प्रयास भी भ्रष्टाचार में ही शामिल होता है। उन्होंने पूरे जिले में शिक्षक विद्यार्थी अनुपात को सख्ती से लागू किए जाने की मांग की है। ऐसा भी सामने आया है कि लगभग डेढ़ साल में तैयार हुई तबादला सूची में कई दिव्यांगों और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के भी तबादले कर दिए गए। जिससे सूची की पारदर्शिता पर भी सवाल उठे हैं।
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मॉडिफिकेशन को लेकर निदेशालय से बातचीत जारी है। मंगलवार को भी निदेशक से मुलाकात कर चर्चा की गई है। सौ के लगभग तबादलों की मॉडिफिकेशन की सूची तैयार की गई है। फिलहाल इसकी संख्या भी कम करने के निर्देश मिले हैं। निदेशालय से मंजूरी मिलते ही मॉडिफिकेशन सूची जारी कर दी जाएगी। पूर्व के तबादलों में स्वास्थ्य संबंधी और दिव्यांग मामलों को आदेश से पूर्व चिन्हित नहीं किया गया था, ऐसे लगभग 39 आदेशों को जिला स्तर पर मॉडिफाई पूर्व में किया गया है।
राजीव अबरोल, मुख्य शिक्षा अधिकारी, कठुआ