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Kathua News: कुलदेवी के दर पर शीश झुकाकर समृद्धि और मन की शांति मांगी

Tue, 28 Nov 2023 12:47 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कठुआ। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के चलते जिले में विभिन्न कुलदेव स्थानों पर वार्षिक मेलों को आयोजन किया गया। जहां विभिन्न बिरादरियों के लोगों ने जुट कर अपने-अपने कुलदेव का दर्शन कर सुख शांति की कामना की। शहर के वार्ड 10 स्थित माता सत्योती मंदिर में लूथरा बिरादरी की जबकि गांव चन्नग्रां में मनाथ महाजन बिरादरी की वार्षिक मेल का आयोजन किया गया। इसमें देश के विभिन्न भागों से आए बिरादरी के सदस्यों ने कुलदेवी के स्थान पर शीश झुकाकर सुख शांति की कामना की।

सोमवार को आयोजित मेल के चलते सुबह से मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतार लगना शुरू हो गई थी। इस दौरान जहां लोगों ने कुल देवी का पूजन किया। वहीं, नव विवाहित जोड़ों ने कुलदेव मंदिर की परिक्रमा कर उनका आशीष प्राप्त किया। इसके चलते दिन भर मंदिर में मेले जैसा माहौल देखने को मिला। मंदिर में दर्शन करने के बाद परिसर में आयोजित भंडारे में हजारों की संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। वहीं इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने विभिन्न व्यंजनों के स्टाल लगाकार लोगों को प्रसाद वितरित किया। लूथरा बिरादरी के प्रधान कृष्ण लाल लूथरा ने बताया कि कुलदेवी का स्थान पर एक प्राचीन मंदिर है, जहां देश भर से आने वाले उनकी बिरादरी के सदस्यों के साथ ढल्ले बिरादरी के लोग भी कुलदेवी का आशीष लेने के लिए आते है।
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चन्नग्रां स्थित माता सत्योती मंदिर में भी मनाथ महाजन विरादरी के वार्षिक मेल का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए बिरादरी के सदस्यों ने कुलदेवी के चरणों में अपनी हाजिरी लगाते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। वार्षिक मेल के चलते मंदिर में रविवार से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। इस कारण वहां मेले जैसा वातावरण देखने को मिला। कठुआ नगरी मार्ग पर स्थित मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तमाम इंतजाम के बाद भी इस मार्ग पर सुबह से जाम की सी स्थिति बनी रही। मंदिर के महात्म की जानकारी देते हुए बिरादरी के प्रधान सूरज मेहता और उप प्रधान पूर्ण महाजन ने बताया कि मंदिर में कुलदेवी की मोहरे हैं। अब श्रद्धालुओं द्वारा करवाए गए मंदिर विकास कार्यक्रम के बाद यहां माता की संगमरमर निर्मित मूर्ति स्थापित की गई है। इस मंदिर के स्थान की बिरादरी में काफी मान्यता है। यहां मंदिर परिसर में माता सत्यवती के चरणों में एक बावली भी स्थित है, जिसका पानी इतना पवित्र माना जाता है कि बिरादरी के लोग इसे अपने साथ लेकर जाते हैं और वर्ष भर उसे चरणामृत की तरह प्रयोग करते हैं। उधर बुआ की बाई मंदिर में भी विभिन्न बिरादरियों की मेल का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने भाग लेकर वहां होने वाले हवन-यज्ञ में हिस्सा लिया और कुलदेवी का आशीष प्राप्त किया। इसके चलते पूरा दिन मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिर में माता का दर्शन करने के बाद भक्तों ने वहां आयोजित होने वाले क भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
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