कठुआ। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ जिले में एक बार फिर आग लगने की घटनाएं सामने आना शुरू हो गई हैं। हर साल इस मौसम के दौरान होने वाली सैकड़ों घटनाओं के बावजूद आग से निपटने के लिए जिले में इंतजाम आज भी भगवान भरोसे हैं। करीब आठ लाख की आबादी वाले जिला कठुआ के पहाड़ी क्षेत्र में आज तक आग से निपटने के लिए कोई इंतजाम नही है। वहीं करीब सवा लाख घरों व हजारों संस्थानों में आग से निपटने के लिए जिला मुख्यालय पर मात्र चार फायर टेंडर और हीरानगर तहसील में तीन फायर टेंडर मौजूद हैं। जो 2621 वर्ग किलोमीटर वर्ग में फैले जिले में आग से निपटने के लिए ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित हो रहे हैं। लिहाजा इस बार भी पूर्व की भांति ही आग लगने से होने वाले नुकसान का दंश झेलना पड़ सकता है।
दरअसल एक फायर टेंडर पर लगभग एक दर्जन कर्मचारियों की जरूरत होती है। मौजूदा समय की बात की जाए तो इन सात फायर टेंडर पर मात्र 33 कर्मचारी उपलब्ध हैं जो पूरे जिले में लगने वाली आग की घटनाओं से निपटने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कठुआ फायर स्टेशन में चार फायर टेंडरों के लिए 19 और हीरानगर में तीन फायर टेंडरों के लिए 14 कर्मचारी हैं। आग से निपटने के लिए इंतजामों के अभाव के कारण वर्ष 2021-22 में हुई 269 आग लगने की घटनाओं में 1 करोड़ 33 लाख 32 हजार की संपत्ति स्वाह हो गई। इसी तरह वर्ष 2022-23 में भी 281 आग लगने की घटनाएं हुईं, इनमें भी 6 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जल राख हो गई, जबकि पहाड़ी क्षेत्र में इसके अतिरिक्त भी कई ऐसे मामले रहे हैं जो रिपोर्ट ही नहीं हुए।
कठुआ और हीरानगर के फायर टेंडरों की सेवाएं ही जिले की तीन पहाड़ी तहसीलों के लिए उपलब्ध हैं। ऐसे में जब तक फायर टेंडर मौके पर पहुंचते हैं तब तक सबकुछ जलकर राख हो चुका होता है। ऐसे ही हालात से दो-चार बनी तहसील के लोगों ने गत वर्ष ब्लॉक दिवस कार्यक्रम के दौरान डीसी कठुआ के समक्ष अपनी समस्या रखते हुए उन्हें एक फायर टेंडर देने की बात कही थी। तब डीसी ने भी लाेगों को आश्वासन दिया था कि वह बनी में आग से निपटने के लिए छोटे फायर टेंडर की व्यवस्था करवाने का प्रयास करेंगे। क्योंकि छोटे फायर टेंडर ही पहाड़ी इलाके में ज्यादा कारगर होंगे, लेकिन एक साल का वक्त बीतने के बाद भी अभी तक बनी के लोगों को उक्त सुविधा नहीं मिल पाई है।
आग लगने के मामलों को लेकर यह हालात पिछले 60 साल से जारी हैं। नए फायर स्टेशन खोलने की प्रक्रिया प्रस्तावों तक ही सीमित है, वहीं स्टाफ बढ़ाने को लेकर भी सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। कठुआ जिले में बड़े पैमाने पर औद्योगिक इकाईयां स्थापित हो रही हैं। शहर और ग्रामीण इलाकों में आबादी और इमारतें भी बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में सालाना स्तर पर आग लगने की वारदातें भी बढ़ती जा रही हैं।
कोट
कठुआ फायर स्टेशन और हीरानगर फायर स्टेशन के पास मौजूद फायर टेंडर और जवानों पर बसोहली, बिलावर व बनी में भी आग बुझाने का जिम्मा है। उक्त सुविधा के माध्यम से जहां तक सड़कों की व्यवस्था है आग को काबू करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाते हैं। गर्मी का सीजन शुरू होने के बाद से सभी को अलर्ट पर रखा गया है। हालांकि जिले का क्षेत्रफल काफी ज्यादा है, इसमें पहाड़ी इलाकों के लिए अलग से फायर टेंडर और स्टाफ की जरूरत है। इसके लिए कई बार पहले भी लिखा गया है। ताकि पहाड़ी क्षेत्र में लगने वाली आग को भी काबू करने के लिए कारगर कार्रवाई संभव हो पाए।
-राज कुमार रैना, सहायक निदेशक फायर स्टेशन, कठुआ