करीब चार लाख रुपये की राशि से बनाया जाना था शौचालय और स्कूल इमारत
इमारत का निर्माण अधूरा होने से किराए के कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे
स्कूल की निर्माणाधीन इमारत का काम अधर में लटका
संवाद न्यूज एजेंसी
बसोहली। बसोहली के कोट इलाके में 2011 में सर्वशिक्षा अभियान के तहत करीब चार लाख रुपये की लागत से प्राइमरी स्कूल और शौचालय बनाने का कार्य शुरू हुआ था। शौचालय तो बन गया लेकिन स्कूल की इमारत का कार्य अधर में लटक गया। वहीं 11 साल पहले बना शौचालय बिना इस्तेमाल ही बदहाल हो गए। अब शीतलनगर पंचायत प्रतिनिधि के प्रयास के कैपेक्स बजट से स्कूल के अधूरे निर्माण कार्य को पूरा किया जा रहा है। अगले कैपेक्स बजट से शौचालय को भी दुरुस्त कराया जाएगा।
यहां एक तरफ सरकार शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये के फंड उपलब्ध करवा रही है, वहीं जमीनी स्तर पर इस्तेमाल होने वाले फंडस की बर्बादी किस तरह से हो रही है यह प्राइमरी स्कूल लोअर कोट की इमारत को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं। स्थानीय निवासी गुड्डू राम, नीरज कुमार, विभीषण कुमार ने बताया कि वर्ष 2011 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्राइमरी स्कूल कोट की इमारत का काम शुरू हुआ था, इमारत का काम अधर में लटका हुआ है। मौजूदा समय में इस स्कूल के साथ जो शौचालय और किचन शेड बनाए गए थे वह रखरखाव के अभाव के कारण पूर्णता बदहाल हो गए हैं। शौचालय और किचन के भीतर व बाहर की दीवारों पर अधिकतर प्लास्टर उखड़ चुका है।
जोनल शिक्षा अधिकारी बसोहली रामदास ने बताया कि मौजूदा समय में यह स्कूल किसी के घर में स्थित किराए की इमारत में चल रहा है। यहां से कुछ दूरी पर स्कूल की इमारत व शौचालय को बनाया गया है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत यह काम करीब 10 वर्ष पूर्व शुरू हुआ था। सबसे पहले शौचालय और किचन शेड बनाया गया था। इसके बाद इस इमारत का काम शुरू हुआ था। ठेकेदार बीच में काम छोड़कर चला गया था इसके बाद कार्रवाई की गई। इमारत का काम पूरा होने के बाद स्कूल को यहां शिफ्ट किया जाएगा, जिसके बाद बदहाल हुए शौचालय की भी मरम्मत की जाएगी। शीतलनगर पंचायत के सरपंच कुलदीप राज ने बताया कि कैपेक्स बजट के तहत इस इमारत के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए 6 लाख रुपये के फंडस उपलब्ध करवाए गए हैं। इमारत के प्लास्टर से लेकर इमारत के दरवाजे व अन्य काम करवाए जाने हैं। 1 कनाल 18 मरले में बनने वाली इस इमारत के सुधार हेतु कार्य किया जा रहा है। 2011 में इस इमारत का काम शुरू हुआ था। उस समय सर्व शिक्षा अभियान के तहत करीब चार लाख रुपये के फंडस आए थे। ठेकेदार के काम छोड़ने के बाद किसी विभाग ने इसकी सुध नहीं ली। अब इस इमारत के बचे हुए काम के लिए कैपेक्स बजट के फंडस का उपयोग किया जा रहा है। इस काम के बाद जो शेष काम बचेगा उसे अगले कैपेक्स बजट में रखा जाएगा।