विधायक राजीव जसरोटिया ने शुरू करवाया काम
पहले उज्ज दरिया के उफान पर आने से कट जाता था ग्रामीणों का संपर्क
कठुआ। जुथाना में पुल से गुजरने का सपना अब ग्रामीणों के लिए जल्द पूरा होने जा रहा है। 10 साल में पूरी हुई इस परियोजना के लिए दस हजार की आबादी को बड़ा लाभ मिलेगा। बुधवार को जसरोटा विधायक राजीव जसरोटिया ने पुल की अप्रोच सड़क का निर्माण 50 लाख की लागत से शुरू करवा दिया।
इसके अलावा विधायक ने एक अन्य सड़क का भी उद्घाटन किया। सेहस्वां से एसटी बस्ती रजानी तक बनी सड़क पर पांच लाख की राशि खर्च की गई है। जसरोटिया ने कहा कि इन सड़कों के निर्माण से गांवों में आवागमन सुचारु होगा, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही आसान बनेगी। इससे ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल सीमेंट और डामर नहीं होतीं बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और प्रगति की राह खोलती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना का उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। इस दौरान विधायक ने लोगों की समस्याएं भी सुनीं और उनके समाधान का भरोसा दिलाया। इसके अलावा जसरोटिया ने बेहतर ग्रामीण संपर्क, आवश्यक सेवाओं तक आसान पहुंच और क्षेत्रीय विकास को गति देने के अपने संकल्प को भी दोहराया।
वर्ष 2016 में शुरू हुआ था जुथाना पुल का निर्माण, एक साल पहले बनकर हुआ तैयार
2016 में जखोल से जुथाना के बीच उज्ज दरिया पर बन रहे पुल का काम वर्ष 2016 में शुरू हुआ था। केंद्रीय सड़क फंड्स (सीआरएफ) के तहत 30 करोड़ से इस परियोजना का काम निर्धारित किया गया। आधे-अधूरे काम के बीच सीआरएफ बंद हो गया, जिसके बाद इसे लंबित परियोजनाओं में तब्दील कर दिया गया। अंधेरा ढलने के बाद ग्रामीणों का उज्ज के पार आना लगभग नामुमकिन हो जाता है तो वहीं सुबह स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर पुल पार करना पड़ता था।
जान जोखिम में डाल पुल पार करते रहे लोग
वर्षों तक लोग जान जोखिम में डाल इसके अधूरे पिलर के डेढ़ फुट संकरी पट्टी पर चलते रहे हैं, जो मौत के कुंए से कम नहीं रहा। रोजाना पुल पार करने वालों में स्कूली विद्यार्थी, कामकाजी लोग व स्थानीय व्यापारी थे। एक अनुमान के मुताबिक रोजाना लगभग 200 स्कूली बच्चे और सैकड़ों ग्रामीण इसी रास्ते से होकर आवाजाही करते हैं। पहले जुगाड़ लगाकर पुल पर चढ़ने के लिए लगाई लोहे की खड़ी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं और फिर डेढ़ फुट के पिलर से पुल पार करना पड़ता था। कभी कभार आने वालों की यहां पहुंचकर सांसें तक अटक जाती थीं। बाढ़ के दिनों में तो हालात और भी बद्तर होते रहे।
.................................................
बीमार लोगों को पुल पार करवाने में आती थी दिक्कत
जुथाना के स्थानीय बताते हैं कि पुल पार की पंचायतों वाले गांवों के लोग अपनी बेटियों की शादी इस ओर करने से परहेज करते थे। अगर रिश्ता पक्का हो भी जाए तो शादी की सारी रस्में पुल के इस पार जखोल में ही करनी पड़ती थीं। गर्भवती और बीमार लोगों को पुल से पार करवाने में भारी दिक्कत आती रहीं। बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती थी, बीमार लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ देते थे। उज्ज दरिया उफान पर आने के बाद इस इलाके के लोग कटकर रह जाते थे। कई पीढ़ियां पुल के इंतजार में चली गईं, लेकिन अब इसका काम पूरा होने से इस गांव की तकदीर बदल जाएगी।