आरोपी के व्यक्तिगत और जमानती बांड को खारिज करने का आदेश दिया
कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने मारपीट, धमकी और लूट मामले में आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष मामला संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन को अपने आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होता है जो इस मामले में नहीं हो पाया। लिहाजा आरोपी को बरी करने का निर्देश दिया जाता है। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी के व्यक्तिगत और जमानती बांड को खारिज करने का आदेश दिया है।
पुलिस की ओर से कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार धनी राम पुत्र राम लाल निवासी भइया हीरानगर पर आरोप था कि उसने 28 मार्च 2018 को शिकायतकर्ता कृष्ण चंद के साथ मारपीट कर जेब से 10 हजार की नकदी लूट ली और उसे जान से मारने की धमकी दी थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धाराओं 323, 341, 382, 201, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज किया था। 11 फरवरी 2019 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किया गया था। इसमें आरोपी ने उसके लगाए गए आरोपों से इनकार किया और चालान का विरोध करने का अनुरोध किया। इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को मामले के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति दी। अभियोजन पक्ष ने चालान में उल्लिखित छह गवाहों में से सिर्फ दो ही गवाहों को प्रस्तुत किया गया। इसमें खुद शिकायतकर्ता ने बताया कि घटना के समय बेहोश हो गया था और उनके पुत्र ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया था। केशव शर्मा जोकि शिकायतकर्ता का बेटा है और उसने गवाही में दावा किया कि उन्होंने अपने पिता को बचाया और पूरी घटना देखी। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी ने खोकरी (तेजदार हथियार) से हमला किया था और उसके पिता से पैसे भी छीन लिए थे। इसके अलावा कोर्ट ने माना कि दोनों गवाहों के बयान आपस में विरोधाभासी हैं। एक ने कहा कि कोई शोर नहीं हुआ, जबकि दूसरे ने कहा कि शोर सुनकर वह मौके पर पहुंचा था। इसके अलावा कोर्ट ने पाया कि मामले में कोई भी स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया जबकि घटनास्थल के आसपास 10 से 20 घर मौजूद थे। साथ ही पुलिस ने खून से सना हुआ कपड़ा या मिट्टी जब्त नहीं की थी और न ही जांच अधिकारी और डॉक्टर की गवाही करवाई गई। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपना मामला संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। लिहाजा आरोपी पर लगाए सभी आरोपों से बरी करने का फैसला सुनाया गया।