सजा पूरी होने के बाद भी पति भरण पोषण की देनदारी से मुक्त नहीं हो सकता : अदालत
कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने पत्नी और दो बच्चियों को भरण-पोषण की राशि उपलब्ध न करवाने पर पति को एक माह की सजा सुनाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी पति को यह सजा भरण पोषण की राशि भुगतान न करने के लिए दी गई है। यह भी साफ किया है कि सजा पूरी होने के बाद भी पति भरण पोषण की देनदारी से मुक्त नहीं हो सकता।
वीना देवी पत्नी अजीत कुमार निवासी बसोहली ने कोर्ट में भरण पोषण को लेकर अपील दायर की थी। आवेदक ने अपील में बताया कि अदालत ने 19 सितंबर 2020 को उसके पति को आदेश दिया था कि उसे पत्नी और दो बच्चियों के भरण-पोषण के लिए प्रतिमाह 6 हजार की राशि देनी होगी। मगर उसके पति ने उन्हें एक भी महीने राशि का भुगतान नहीं किया। इसके चलते भरण-पोषण की बकाया राशि जमा होकर 1.8 लाख हो गई है। महिला ने बताया कि आदेश के अनुसार अदालत ने उसके पति को आदेश दिया था कि तीन हजार की राशि पत्नी और सामान राशि दोनों बेटियों की देखभाल के लिए देनी होगी।
अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए 28 जून 2025 को आदेश दिया कि यदि आरोपी पति ने भरण-पोषण की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया तो एक माह की जेल होगी, लेकिन इसके बावजूद उसने भरण-पोषण की राशि अदा नहीं की। इसके बाद अदालत ने बीते 14 नवंबर 2025 से लेकर 13 दिसंबर 2025 तक एक महीने के लिए जेल भेज दिया गया। अदालत ने बीते 15 दिसंबर को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी के जेल से छूटने के बाद भी बकाया राशि की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि फिलहाल अदालत के पास कोई अन्य वसूली का तरीका उपलब्ध नहीं है। कहा कि याचिकाकर्ता यदि भविष्य में आरोपी की संपत्ति या आय का कोई स्रोत बताएंगे तो फाइल को फिर से खोला जा सकता है। तब तक मामला रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित रखा जाएगा।