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Kathua News: आत्मिक शांति के लिए विचारों में सात्विकता जरूरी

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बिलावर। मांडली गांव में जारी श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के चौथे दिन कथा वाचक सुभाष शास्त्री ने अपने प्रवचनों में आत्मिक शांति प्राप्त करने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि कहा कि आत्मिक शांति के लिए विचारों में सात्विकता जरूरी है। हम जटिलताओं से जितना दूर रहेंगे, उतना ही विचारों में उत्कृष्टता ला सकते हैं। जीवन का सारा महत्वपूर्ण समय हमारे व्यर्थ के कार्यों में चला जाता है।
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ऐसे में हमें अपने जीवन के महत्वपूर्ण समय का इस्तेमाल मानव कल्याण, समाज के लिए और स्वयं के विकास के लिए करना चाहिए। इससे हम सदा सुखी, समृद्ध और आत्मिक शांति अर्जित कर सकते हैं। कथावाचक ने आगे कहा कि जब हमारा मन शांत होगा और हम सभी तरह से संतुष्ट होंगे तभी हमारे मस्तिष्क में विकास के विचार उत्पन्न होंगे। हमारा शरीर और संसार गतिशील है और गति विकास की पहचान है। त्याग से आत्म बल का निर्माण होता है। त्याग और दान में अंतर है। त्याग में कभी-कभी अपने पास की वह वस्तु भी दे दी जाती है, जिसके अभाव में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। अहंकार युक्त त्याग शांति के साथ ही मन मस्तिष्क में विकार उत्पन्न करता है। त्याग और सुख एक दूसरे के पूरक हैं। अगर हम सुख चाहते हैं और त्याग भी नहीं करना चाहते तो यह है स्वार्थ की श्रेणी में आता है, हमें इससे बचना चाहिए।
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