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Kathua News: 40 पीएचसी डॉक्टरों के बिना, मरीजों की बढ़ीं मुश्किलें

Thu, 16 Apr 2026 02:00 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित, फार्मासिस्ट व आयुष कर्मचारी दे रहे सेवाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी


कठुआ। जिले के ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्थापित 75 फीसदी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बिना एमबीबीएस डॉक्टरों से संचालित हो रही है। इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें छोटी-मोटी बीमारी के इलाज के लिए कई किलोमीटर की दूरी तय कर उपजिला व जिला अस्पतालों को जाना पड़ता है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले की 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में से 40 में एक भी एमबीबीएस डॉक्टर तैनात नहीं हैं। हालत यह है कि केवल 12 पीएचसी में ही डॉक्टर की उपलब्ध हैं जबकि बाकी केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ या फिर आयुष कर्मचारियों के भरोसे चल रही हैं। डॉक्टरों की सबसे अधिक कमी पहाड़ी क्षेत्रों में है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को मामूली बीमारी या आपात स्थिति में भी कई किलोमीटर दूर उपजिला अस्पतालों अथवा जिला अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है। इससे मरीजों को समय और पैसे दोनों की अतिरिक्त मार झेलनी पड़ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बनी की एक पीएचसी को छोड़कर चार में बिना डॉक्टर से संचालित हो रही है। वहीं, बसोहली ब्लॉक की 10 और हीरानगर की सात में एक भी डॉक्टर की तैनाती नहीं हैं। वहीं परोल और बिलावर की आधी से ज्यादा पीएचसी में डॉक्टर नहीं हैं, जबकि तीन शहरी पीएचसी भी स्थापना के एक दशक बाद भी डॉक्टर नहीं मिला है।
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53 में से 12 पीएचसी यहां डॉक्टर की है तैनाती

पीएचसी का नाम डॉक्टर की तैनाती
1. मच्छेडी 1
2. कोहग 1
3. नगरोटा गुजरू 1
4. उच्चा पिंड 1
5. भडू 1
6. गूडू फलाल 1
7. फ्लोट 1
8. लखनपुर 2
9. घाटी 1
10. खरोट 1
11. धन्नी 1
12. बनी की एक पीएचसी 1
कोट
जिले के ज्यादातर स्वास्थ्य कंद्रों में डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े है। इससे दूरदराज के क्षेत्र सबसे प्रभावित हो रहे है। समय-समय पर उच्च अधिकारियों सहित सरकार को अवगत करवाया गया है। उम्मीद है कि जल्द खाली पद भरे जाएंगे और लोगों की परेशानी का हल निकलेगा।

-डॉ. विजय रैना, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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