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गेहूं के दाने मुट्ठी में ले माथे पर लगाए, लिया धरती मां का आशीर्वाद

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हीरानगर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर संघर्ष विराम के चलते 20 वर्षों बाद तारबंदी के आगे बोई गई गेहूं की कटाई का काम मंगलवार को शुरू हो गया। 20 वर्षों बाद अपने खेतों में की गई मेहनत का फल देखकर किसान भावुक हो गए। गेहूं के दाने मुट्ठी में लेकर माथे से लगाए और धरती मां का आशीर्वाद लिया।
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दिसंबर में कृषि विभाग की मदद से 35 किसानों ने यहां 141 हेक्टेयर पर गेहूं की बिजाई की। जिला उपायुक्त राहुल यादव ने इस कार्य की शुरुआत की और मंगलवार को भी उन्होंने मौके पर पहुंच फसल की कटाई का काम शुरू कराया। बीएसएफ के पहरे के बीच कंबाइन की मदद से फसल की कटाई की गई। पहले दिन करीब 900 क्विंटल गेहूं निकाली गई।
उपायुक्त ने कहा, तारबंदी के आगे खेती के लिए प्रेरित हुए किसानों को हर संभव सहायता दी गई और सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्राथमिकता पर दिया गया। आगे भी इसी तरह से यहां के किसानों को प्राथमिकता पर सहायता दी जाएगी। पहले यहां खेती न होने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन अब अपने खेतों से निकली फसल को देखकर किसान खुश हैं। कुछ किसानों के सहयोग से यह शुरुआत की गई थी, लेकिन अगली बार तारबंदी की आगे की लगभग पूरी भूमि पर खेती की जाएगी।
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डीसी ने कहा कृषि विभाग, बीएसएफ के प्रयासों से और किसानों के सहयोग से तारबंदी के आगे खेती करना संभव हो पाया है। इस बार 35 किसानों ने यहां खेती करने की पहल की, जिसके बाद अब बाकी किसान भी तारबंदी के आगे अपने खेतों में काम करने के लिए प्रेरित हुए हैं। किसानों ने डीसी, कृषि विभाग और बीएसएफ का आभार जताते कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है। भविष्य में भी अगर इसी तरह से प्रशासन का सहयोग मिलता रहा तो सभी किसान अपने खेतों में काम जरूर करेंगे। मौके पर कृषि विभाग के जिला अधिकारी विजय उपाध्याय और बीएसएफ के अधिकारी मौजूद रहे।
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पाकिस्तान की गोलाबारी के बाद 2002 में बंद हुई थी खेती
तारबंदी के आगे पहले भी किसान खेती करते थे, लेकिन वर्ष 2002 में पाकिस्तान की ओर से यहां भारी गोलाबारी की गई, जिसके बाद किसानों ने यहां खेती करना छोड़ दिया था। किसानों को फिर से यहां खेती के लिए प्रेरित करने के लिए जिला प्रशासन को करीब एक वर्ष मशक्कत करनी पड़ी। कई बैठकें प्रशासन, बीएसएफ के अधिकारियों और लोगों के बीच हुईं। किसानों को यहां खेती के लिए बीज और खाद मुफ्त उपलब्ध कराने का वादा किया गया, जिसके बाद चक चंगा के 35 किसानों ने खेती करने के लिए अपने नाम दर्ज कराए। कृषि विभाग ने तारबंदी के आगे की जमीन को खेती लायक बनाया। किसानों ने खुद खेतों में जाकर गेहूं की बुआई की। यहां खेती करने के लिए आगे आए किसानों को कृषि विभाग की ओर से सब्सिडी पर ट्रैक्टर और अन्य उपकरण भी मुहैया कराए गए।
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इस बार 1100 क्विंटल
गेहूं निकलने की उम्मीद
- अगली बार बढ़ाया जाएगा खेती का दायरा
जिला मुख्य कृषि अधिकारी विजय उपाध्याय ने बताया कि तारबंदी के आगे 12 सौ हेक्टेयर कुल जमीन है। शुरुआत में चक चंगा में 35 किसानों ने 141 हेक्टेयर भूमि पर खेती की है। जहां से कटाई के बाद पहले दिन करीब 900 क्विंटल गेहूं निकली है। यहां कुल 1100 क्विंटल गेहूं निकलने की उम्मीद है। मौसम अच्छा न होने के बावजूद यहां अच्छी पैदावार हुई है, जिससे अंदाजा है कि यह जमीन बेहद उपजाऊ है। अब यहां अगली फसल की तैयारी भी शुरू कर दी जाएगी और इस बार पांच गुना अधिक भूमि पर खेती करवाने का लक्ष्य है और आने वाले समय में तारबंदी के आगे की पूरी भूमि पर खेती करवाएंगे।
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किसानों के साथ साए की
तरह रहे बीएसएफ के जवान
आईबी पर संघर्ष विराम के चलते तारबंदी के आगे खेती संभव हो पाई, लेकिन इसमें बीएसएफ की अहम भूमिका रही। जीरो लाइन पर 20-20 फुट की दूरी पर बीएसएफ के जवान तैनात रहे और किसान बेखौफ होकर खेती करते रहे। खेती शुरू कराने से लेकर कटाई तक बीएसएफ के जवान किसानों के साथ साए की तरह रहे। बीएसएफ के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वे किसानों को पूरी सुरक्षा देंगे और किसान बिना किसी डर के अपने खेतों में काम कर सकते हैं।
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