कठुआ। बैसाखी से पहले ही सिंचाई विभाग ने कठुआ नहर में पानी छोड़ दिया है, लेकिन इसमें बड़ी लापरवाही सामने आई है। नहर की सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही नहर में पानी छोड़ दिया गया है। इससे किसानों में खासा रोष है। किसानों के मुताबिक इससे जहां साइफन में नहर के चोक होने का खतरा है वहीं नहरों का यह कचरा अब सीधे खेतों में पहुंचेगा। इससे पहले से ही जजर्र हालत में चल रही कूहलों के ओवरफ्लो होने का खतरा भी मंडराने लगा है।
दरअसल लगभग बीस दिन से नहर की सफाई और जरूरी मरम्मत का कार्य रविवार को भी जारी था। जिला सचिवालय से सटी नहर के किनारे स्थित गुरुद्वारे के नजदीक मशीनें अभी नहर से मलबा हटाने के काम में लगी थीं। इसी बीच अचानक सिंचाई विभाग ने नहर में पानी छोड़ दिया। नहर में कई जगह कचरे के ढेर और मलबे को हटाने का काम किया जाना था, लेकिन इससे पहले ही पानी छोड़ देने से विभागीय कार्यवाही सवालों के घेरे में आ गई है। कुछ दिन पहले ही ठेकेदार द्वारा नहर की सफाई के नाम पर कचरे को भी शहर के बीचों बीच नहर में जलाने का काम किया जा रहा था जिस पर नगर परिषद ने संज्ञान लेने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया था। किसानों ने बताया कि हर साल विभाग नहरों की सफाई के नाम पर खानापूर्ती करता है। कई जगह सफाई की ही नहीं जाती है और उसकी राशि जारी करवा दी जाती है। इस बार भी विभाग ने काम पूरा होने से पहले ही नहर में पानी छोड़ दिया है। इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाई जानी चाहिए।
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कोट
नहर में पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन जिस जगह सफाई पूरी नहीं हुई है वहां पानी नहीं छोड़ा जाएगा। 80 फीसदी तक सिविल कार्यों को अंजाम दिया जा चुका है। शेष काम कभी भी अंजाम दे दिए जाएंगे।
-अनिल कुमार गुप्ता, कार्यकारी अभियंता सिंचाई विभाग