बनी। हुनर हाथों में हो और कुछ नया करने का जज्बा दिल में तो एक साधारण-सा धागा भी आत्मनिर्भरता की मजबूत डोर बन जाता है। जम्मू-कश्मीर के जिला कठुआ के पहाड़ी क्षेत्र बनी की बेटियां और महिलाएं आज इसी हौसले से महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों को संभालते हुए यहां की महिलाएं क्रोशिया कला और हैंडीक्राफ्ट के जरिए रंग-बिरंगे फूल, गुलदस्ते और सजावटी उत्पाद तैयार कर न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं। क्रोशिया कला से अपनी पहचान बना रहीं सोनिका देवी इस सकारात्मक बदलाव का चमकता चेहरा हैं। वह बताती हैं कि हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर उन्हें बेहतरीन आमदनी हो रही है। अपनी कला के दम पर वह हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक कमा रही हैं। सोनिका का कहना है कि हाथों से तैयार किए गए टिकाऊ और आकर्षक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे उनका आत्मविश्वास और परिवार का संबल दोनों मजबूत हुए हैं।
क्षेत्र की युवा हुनरमंद नुसरत इम्तियाज ने डिजिटल युग का सही उपयोग कर आत्मनिर्भरता की राह चुनी। उन्होंने सोशल मीडिया और यूट्यूब ट्यूटोरियल्स के जरिए हैंडीक्राफ्ट की बारीकियां सीखीं और अभ्यास से नए-नए डिजाइन तैयार किए। पिछले एक महीने में ही वह हस्तनिर्मित उत्पाद बेचकर करीब 5 से 6 हजार रुपये कमा चुकी हैं। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए नुसरत ने रंग-बिरंगे फूलों के साथ-साथ डिजाइनर मोमबत्तियां भी तैयार की हैं, जिन्हें बाजार में ग्राहकों द्वारा खूब सराहा जा रहा है। नुसरत का कहना है कि ग्राहकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया उन्हें इस हुनर को एक बड़े कारोबार में बदलने की ऊर्जा देती है।
बनी की इन कर्मठ महिलाओं की सफलता यह साबित करती है कि रोजगार के लिए हमेशा भारी-भरकम पूंजी की जरूरत नहीं होती। दृढ़ इच्छाशक्ति और हुनर के दम पर घर की दहलीज से भी कामयाबी की शुरुआत की जा सकती है। यदि स्थानीय स्तर पर इन महिला कारीगरों को क्लस्टर स्तर पर प्रशिक्षण, डिजिटल मार्केटिंग और सरकारी योजनाओं का साथ मिले तो बनी की यह हस्तकला न केवल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल करेगी बल्कि सैकड़ों अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का स्थायी मंच बनेगी।