अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर कर्मचारियों ने काली पट्टियां बांधकर किया प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जीएमसी के नॉन-गजेटेड कर्मचारियों ने सरकार द्वारा भर्ती नियमों बनाने में हो रही देरी को लेकर दूसरे दिन भी सहायक अस्पताल की ओपीडी को ठप रखा। कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के कारण सहायक अस्पताल की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं। इससे उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं चलती रहीं जिस कारण मरीजों को कुछ हद तक राहत मिली।
सुबह से ही बड़ी संख्या में मरीज ओपीडी ब्लॉक के बाहर चिकित्सकीय सलाह के लिए भटकते रहे। कई मरीजों ने लंबा इंतजार किया, जबकि कुछ को बिना इलाज लौटना पड़ा। इस दौरान कर्मचारियों ने ओपीडी ब्लॉक के बाहर धरना देकर सरकार और संबंधित विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं, प्रदर्शनकारियों हड़ताल के दूसरे दिन दुनिया भर में मनाया जा रहा अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस को ब्लैक डे के रूप में मनाया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जब तक सरकार भर्ती नियमों को लेकर तय समय की घोषणा नहीं करती, तब तक उनका धरना-प्रदर्शन इसी तरह से जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने शामिल नर्स निशा का कहना है कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुए छह साल हो गए है, लेकिन सरकार है कि अभी तक नॉन-गजेटेड कर्मचारियों की सेवा नियम ही तय नहीं कर सकी है। उन्होंने जीएमसी में वर्तमान में तीन सौ से अधिक कर्मचारी कार्यरत है, लेकिन उन्हें नहीं पता कि उन्हें कब पदोन्नति मिलेगी। नर्स काजल ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार आश्वासन तो मिला, पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसको लेकर आज कर्मचारी हड़ताल पर है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 100 बिस्तरों का अस्पताल बढ़कर 500 बिस्तरों का हो गया है, लेकिन भर्ती नियम न होने से न तो नई भर्ती हो रही है और न कार्यरत कर्मचारियों को अपने भविष्य के बारे में पता है। कर्मचारियों ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू से तत्काल हस्तक्षेप कर भर्ती एवं सेवा नियमों को बिना किसी और देरी के अंतिम रूप देकर अधिसूचित करने की मांग की।
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अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस को ब्लैक दिवस के रूप में मनाया
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें मजबूरन अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस को ब्लैक दिवस के रूप में मनाना पड़ रहा है। आज ज्यादातर संस्थानों में नर्सों के योगदान को याद किया जा रहा है। उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। लेकिन जीएमसी की नर्स स्टाफ धरना प्रदर्शन करने को मजबूर है। रंजीत शर्मा ने कहना है कि इन नर्सों ने कोरोना काल, ऑपरेशन सिंदूर और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में दिन-रात मरीजों को मरीजों को सेवाएं दी है। लेकिन सरकार है कि उनके लिए अबतक भर्ती नियम ही तय नहीं कर सकी है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका मानना है कि उनके प्रदर्शन से मरीज परेशान हो रहे है, लेकिन इसके लिए सरकार और जीएमसी का प्रशासन जिम्मेदार है।