आठ साल पुराने मामले में अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने आठ साल पुराने आबकारी मामले में एक 76 वर्षीय बुजुर्ग आरोपी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने यह फैसला आरोपी के अपराध स्वीकार करने के बाद सुनाया है।
आदेश के अनुसार कोर्ट ने बुजुर्ग को छह साल की साधारण कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। बाद में कोर्ट ने आरोपी की उम्र और पहली बार अपराधी होने के आधार पर उसे एक वर्ष की प्रोबेशन पर रिहा कर दिया। इसके लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्य बडयाल की अदालत में चालान दायर किया गया था। चालान में आरोपी बलकार सिंह निवासी मंगलूर डिंगा अंब को पुलिस ने साल 2017 में अवैध तरीके से शराब रखने और बचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद हीरानगर पुलिस ने आरोपी पर आबकारी अधिनियम की धारा 48 (ई) के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद चालान को कोर्ट में 31 अक्टूबर 2017 को प्रस्तुत किया।
28 अप्रैल को कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी ने मामले में लंबी सुनवाई के बजाय अदालत के समक्ष स्वयं अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद अभियुक्त पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत से आग्रह किया कि आरोपी को सजा सुनाने के बजाय प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट- 1958 की धारा 3 के तहत अच्छे आचरण पर छोड़ा जाए। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वह पहली बार अपराध में संलिप्त पाया गया है। उसकी आयु लगभग 76 वर्ष है। सरकारी पक्ष ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को कारावास की सजा दी जानी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने पहले आरोपी को छह माह के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा निर्धारित की। इसके बाद प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि उसने पहली बार अपराध किया है, इसलिए उसे सुधार का अवसर दिया जाना न्यायहित में होगा। अदालत ने दोषी की आयु, उसकी मानसिक व शारीरिक हालात को देखते हुए उसे जेल भेजने की बजाय परिवीक्षा पर शर्तों के साथ रिहाई करने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि दोषी को 30 हजार का मुचलका भरने और प्रोबेशन अवधि में कोई अपराध नहीं करने का निर्देश दिया।