डिस्ट्रीब्यूटरी-2, 5, 6,7, और 9 की 15 किलोमीटर लंबी कूहलों के नेटवर्क प्लम कंक्रीट तकनीक से होगा तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। कठुआ नहर की नौ में से पांच डिस्ट्रीब्यूटरी को पक्का करने की मंजूरी मिल चुकी है। इसके तहत पांच डिस्ट्रब्यूटरी का 15 किलोमीटर लंबा कूहलों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार कमांड एरिया डेवलपमेंट (सीएडी) परियोजना के पहले चरण के लिए कुल 3,5,69,000 की राशि मंजूर की गई है। इसमें डिस्ट्रीब्यूटरी-2, 5, 6, 7 और 9 को प्लम कंक्रीट तकनीक से तैयार किया जाएगा। विभाग के अनुसार पांचों डिस्ट्रीब्यूटरी को पक्का करने के कार्य दो चरण में करवाया जाएगा। कुछ एक डिस्ट्रीब्यूटरी का कार्य जून से पहले खेतों में पानी छोडने से पहले पूरा करवा लिया जाएगा, जबकि शेष का अक्टूबर माह में नहरी पानी बंद होने के बाद पक्का किया जाएगा। दरअसल, किसान लंबे समय से इन कूहलों को पक्का करवाने की मांग कर रहे थे। किसानों का कहना था कि कच्ची नहरी कूहलों के चलते जगह-जगह रिसाव, टूट-फूट और कटाव के कारण पानी खेतों तक पहुंचने से पहले ही व्यर्थ बह जाता था।
खासकर अंतिम छोर पर स्थित खेतों को पर्याप्त सिंचाई जल नहीं मिल पाता था जिससे फसलों की उत्पादकता प्रभावित होती थी। बता दें कि कश्मीर नहर पर चकउंदर फीडर से कठुआ नहर में पानी छोड़ा जाता है। इससे लगभग आठ हजार से ज्यादा हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। इस नहर में प्रतिदिन 400 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। इसमें फ्लोट, बरनोटी, पटयाड़ी, शेरपुर, चकद्राब खान, चन्नग्रां, कुलिया, बड़ाला सहित गांवों के खेतों को सिंचाई योग्य पानी उपलब्ध करवाया जाता है।
प्लम कंक्रीट तकनीक से होगा निर्माण
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बार कूहलों का नेटवर्क प्लम कंक्रीट तकनीक से तैयार किया जाएगा। इस तकनीक में सामान्य कंक्रीट के साथ बड़े आकार के मजबूत पत्थरों का उपयोग किया जाता है। इससे नहर की कूहलों का ढांचा ज्यादा टिकाऊ, मजबूत और किफायती तरीके से तैयार होता है। इससे नहर की दीवारों और तल में दरार आने या कटाव होने की संभावना कम रहती है।
सरकार ने पांच डिस्ट्रीब्यूटरी को पक्का करने की मंजूरी दे दी है। इस पर जल्द कार्य शुरू होगा। ज्यादातर डिस्ट्रीब्यूटरी को जून से पहले-पहले पक्का करने की योजना है। शेष को नहर में पानी बंद होने के बाद अक्टूबर माह में पक्का किया जाएगा।
- ब्रिज मोहन राणा, सहायक मृदा संरक्षण अधिकारी, सीएडी दयालाचक