वाहन चालक को गोशाला में रखे गए मवेशियों के भरण-पोषण और देखभाल के लिए 72,875 रुपये का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट ने पशु क्रूरता मामले में एक ट्रक को शर्तों के साथ छोड़ने का आदेश दिया है। आदेश के अनुसार वाहन चालक को गोशाला में रखे गए मवेशियों के भरण-पोषण और देखभाल के लिए 72,875 रुपये का जुर्माना लगाया है।
जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट पूनम गुप्ता की अदालत में दायर अर्जी के अनुसार मामला 15 मार्च का है। इसमें हटली पुलिस टीम सुबह चार बजे लखनपुर से जम्मू की ओर जा रहे ट्रक को जांच के लिए रुकने का संकेत दिया। पुलिस के अनुसार चालक ने नाके से कुछ दूरी पर ट्रक खड़ा किया और मौके से भाग गया। तलाशी के दौरान पुलिस ने उसमें से 25 मवेशियों को क्रूरता से लदा हुआ पाया। पुलिस ने वाहन को जब्त कर मवेशियों को देखभाल के लिए कीडियां गडियाल गोशाला में रखवा दिया।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ बीएनएस की धारा 223 (बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति से मवेशी परिवहन करने), पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11 और पशु परिवहन नियम की धारा 52/54/56 के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। आरोपी वाहन चालक मोहम्मद रूफ निवासी डाक बंगला मीरां साहिब आरएस पुरा जम्मू ने 24 मार्च को कोर्ट में अर्जी देकर वाहन छोड़ने की मांग की जिसका अभियोजन पक्ष ने विरोध किया। सरकारी वकील ने तर्क दिया कि वर्ष 2025 में भी आरोपी पहले भी मवेशी परिवहन करने के अपराध में पकड़ा जा चुका है। वकील ने कोर्ट को बताया कि आरोपी के खिलाफ कठुआ थाना, बटोत थाना और रामबन थाना में पहले से ही एफआईआर दर्ज है। लिहाजा वाहन का परमिट रद्द करने की भी मांग की गई।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि वाहन को लंबे समय तक पुलिस थाने में रखने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब्त वाहनों को लंबे समय तक पुलिस हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी 11 दिनों तक गोशाला में रखे मवेशियों की देखभाल और भरण-पोषण के लिए प्रत्येक मवेशी के हिसाब से प्रतिदिन 265 रुपये की राशि के अनुसार कुल 72,875 रुपये की राशि गोशाला को देने का निर्देश दिया। इसके बाद कोर्ट ने शर्तों के साथ वाहन को छोड़ने का आदेश दिया। कोर्ट ने आरोपी चालक को निर्देश दिया कि वह न तो ट्रक को बेचेगा और न ही उसकी बनावट में कोई बदलाव करेगा। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर उसे अदालत या जांच अधिकारी के समक्ष वाहन पेश करना होगा।