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Kathua News: प्रदेश में पहली बार गठित जिला विकास परिषद का आज पूरा हुआ कार्यकाल

Wed, 25 Feb 2026 01:07 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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- कई मायनों में संघर्षपूर्ण और मिलाजुला रहा पांच वर्षों का सफर
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संवाद न्यूज एजेंसी

कठुआ। प्रदेश में पहली बार गठित जिला विकास परिषद का पांच साल का कार्यकाल मंगलवार को समाप्त हो गया है। वर्ष 2020 में चुनाव के बाद गठित परिषद के सदस्यों ने उत्साह और उम्मीदों के साथ अपना कार्यभार संभाला था लेकिन इन पांच वर्षों का सफर कई मायनों में संघर्षपूर्ण और मिलाजुला रहा।

अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार ने यहां पहली बार त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की। इसी क्रम में जिला स्तर पर 14 सदस्यों वाली जिला विकास परिषद का गठन हुआ। इन पांच सालों में परिषद सदस्यों का कभी उचित प्रोटोकॉल न मिलने को लेकर जद्दोजहद दिखी तो कभी विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि का विभिन्न कारणों से पूरा उपयोग न होने पर खीझ दिखाई पड़ी। देश के अन्य राज्यों के मुकाबले त्रिस्तरीय पंचायती राज के तहत मिलने वाले अधिकारों को समझने पहले दो साल कैसे निकल गए, पता भी नहीं चला।
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इस दौरान राज्य में पहली विधानसभा भंग होने और नई विधानसभा का गठन नहीं हुआ था। परिषद सदस्यों को ज्यादातर समय सरकारी समारोह में फीता काटने और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में भागीदारी तक ही सीमित रहने लगा। वर्ष 2024 में विधानसभा चुनाव के बाद जब विधायकों की सक्रियता बढ़ने लगी तो डीडीसी सदस्यों की भूमिका अपेक्षाकृत कम दिखाई देने लगी।

पूरे कार्यकाल में डीडीसी सदस्यों को न मिला कार्यालय, न आवासीय सुविधा
पूरे कार्यकाल के दौरान जिला विकास परिषद अध्यक्ष के अलावा अन्य किसी भी सदस्य को न कार्यालय की सुविधा मिली और न ही आवासीय सुविधा उपलब्ध हो सकी। यहां तक सरकारी वाहन तक नहीं दिया गया। शुरू से ही जिला विकास परिषद शहर के बीचोबीच या जिला उपायुक्त कार्यालय के नजदीक ही अस्थाई कार्यालय स्थापित करना चाहते थे, लेकिन जिला प्रशासन ने डीडीसी का अस्थायी कार्यालय लखनपुर स्थित पर्यटन विभाग की इमारत में आवंटित किया गया। हालांकि सरकार ने एक साल बाद ही स्थायी कार्यालय स्थापित करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग को राशि आवंटित कर दी थी लेकिन उपयुक्त भूमि न मिलने से कार्यालय निर्माण शुरू नहीं हो पाया। साल 2024 के अंत में कार्यालय निर्माण कार्य शुरू करवाया गया था जो अब तक जारी है। आवासीय सुविधा के लिए सरकार की ओर से 9 करोड़ की राशि का निर्माण कार्य अभी तक शुरू ही नहीं हो पाया है।
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उपलब्धियां भी रहीं, लेकिन नहीं खर्च पाए सालाना मिलने वाला अनुदान


कई सारी चुनौतियों के बावजूद परिषद सदस्यों ने पूरे कार्यकाल के दौरान न केवल ग्रामीण सड़कों, पेयजल, पंचायत भवनों और अन्य आधारभूत ढांचे से जुड़े कई कार्य किए। मगर जितनी राशि आवंटित हर वर्ष डीडीसी सदस्यों को आवंटित होती थी, वे शत प्रतिशत जमीनी स्तर पर खर्च नहीं हो सकी। इसकी कई सारी वजह रहीं। इनमें समय पर टेंडर प्रक्रिया शुरू न होना, टेंडर में देरी के अलावा विकास कार्य की टेंडर की कम बोली के चलते प्रत्येक डीडीसी सदस्य की प्रतिवर्ष 30 से 40 फीसदी फंड लैप्स होते रहे हैं।
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