फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kathua News: दावों के बाद भी नहीं शुरू हुआ अंतरराज्यीय बस अड्डा

विज्ञापन
कालीबड़ी में सरकारी बस सेवा का लाभ लेने के लिए दौड़ लगाते यात्री।  - फोटो : kathua news
विज्ञापन
कठुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग जम्मू–पठानकोट के किनारे और राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ के नजदीक करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) सरकारी दावों के बावजूद भी सक्रिय नहीं हो सका है। निजी बसों को यहां से संचालित करना तो दूर, कभी-कभार बस अड्डे पर आने वाली एसआरटीसी की बसों ने भी यहां आना बंद कर दिया है।
विज्ञापन


इसके परिणामस्वरूप यात्री राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खड़े होकर घंटों बसों का इंतजार करने को मजबूर हो रहे हैं। धूप, बारिश और तेज रफ्तार वाहनों के बीच खड़े रहना यात्रियों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। बता दें कि बीते वर्ष स्थानीय विधायक ने अंतरराज्यीय बस अड्डे को सक्रिय बनाने का मुद्दा विधानसभा में उठाया था। इसके बाद परिवहन विभाग हरकत में आया और सरकारी बसों को बस अड्डे पर रोकने का निर्णय लिया गया। कुछ समय तक बसें यहां रुकीं भी, लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा दिन तक नहीं चलीं। वर्तमान स्थिति यह है कि अंतरराज्यीय बस अड्डे पर न तो कोई नियमित बस रुकती है और न ही यात्री सुविधाओं का उपयोग हो पा रहा है। उल्टा, बस अड्डा बड़े मालवाहक वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग स्थल बनकर रह गया है। जहां चारों तरफ गंदगी और अव्यवस्था फैली हुई है। यात्री प्रतीक्षालय की हालत इतनी खस्ताहाल हो गई है कि वहां खड़ा भी नहीं हुआ जा सकता है। वहीं, आईएसबीटी के दुकानदार बसों के आवागमन न होने से दुकान छोड़कर जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने प्रशासन से ठोस कदम उठाकर बस अड्डे को जल्द से जल्द पूरी तरह क्रियाशील बनाने की मांग की है, ताकि यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार न करना पड़े।




कोट
बीते वर्ष आईएसबीटी सक्रिय होने पर कुछ समय के लिए यहां आवागमन बढ़ा था, लेकिन संबंधित विभाग द्वारा बसों के रुकने की उचित व्यवस्था और समय सारिणी उपलब्ध न करवाने पर यात्रियों ने यहां आना ही बंद कर दिया। इसका सीधा असर दुकानदारों पर पड़ा है। शुरू में ज्यादातर दुकानें चलना शुरू हो गई थीं, लेकिन यहां बसें न आने से कई सारे दुकानदार दुकानें बंद कर दूसरी जगह जा चुके हैं।
विज्ञापन


-चैन सिंह, दुकानदार

-

परिवहन विभाग की तरफ से बस अड्डे पर टिकट की व्यवस्था न होने से न तो यात्री और न ही बसें यहां आती हैं। अगर सरकार ने यहां सही तरीके से व्यवस्था की होती तो आज यह बस अड्डा पूरी तरह क्रियाशील बना होता। गंदगी इतनी है कि कभी-कभार सफाई कर्मचारी यहां आते हैं और लीपापोती कर चले जाते हैं। चारों तरफ गंदगी होने से ग्राहक भी यहां रुकने से हिचकिचाता है। बस अड्डे पर बने शौचालय की हालत तो और भी खराब है। लिहाज संबंधित विभाग को इसे कार्यात्मक बनाने की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए।
विज्ञापन


-राजेश शर्मा, दुकानदार
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें