17 साल बाद आया फैसला, पति ने किया था पत्नी की हत्या का प्रयास
कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पत्नी की हत्या के प्रयास मामले में आरोपी पति को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में दोषी को पांच साल के कठोर कारावास और पांच हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया है कि अगर दोषी जुर्माने की राशि अदा नहीं करता है तो उसे दो महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। मामला 16 सितंबर 2008 का है। कोर्ट ने पूरे 17 साल बाद मामले में सजा सुनाई है।
मंगलवार को सजा पर बहस के दौरान सरकारी वकील राजेश शर्मा ने दलील दी कि आरोपी ने जानबूझकर पत्नी की गर्दन काटकर उसकी हत्या करने का प्रयास किया। मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत से आरोपी को कड़ी सजा सुनाए जाने की अपील की। बचाव पक्ष के वकील टीएन गुप्ता ने आरोपी की उम्र, लंबे समय से चले मुकदमे और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने बताया कि आरोपी वर्ष 2009 से मुकदमे का सामना कर रहा है व उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह अपने चार बच्चों का पालन-पोषण करता है। वर्तमान में पीड़िता आरोपी के साथ नहीं रहती है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता और पीड़िता की पीड़ा के साथ-साथ आरोपी की उम्र, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और पूर्व रिकॉर्ड को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। अदालत ने माना कि आरोपी ने शराब के नशे में पत्नी की हत्या का प्रयास किया जो एक गंभीर अपराध है। हालांकि, लंबे समय से चले मुकदमे, आरोपी की आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए इसे नरमी का आधार माना और पांच साल की सजा और जुर्माने की सजा सुनाई गई।
यह है मामला
मामला 16 सितंबर 2008 का है। जिसमें पीड़िता ने अस्पताल में दिए बयान में कहा था कि उसका पति अक्सर शराब के नशे में उसे मारता-पीटता था। घटना वाले दिन सुबह साढ़े नौ बजे जब वह रसोई में खाना बना रही थी, तभी आरोपी ने पीछे से आकर उसके बाल पकड़ लिए और गले पर धारदार हथियार से वार कर दिया। घायल महिला को पड़ोसियों और बहन ने बचाया और अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद राजबाग पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 307 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से खून से सनी मिट्टी, कपड़े और हथियार (चाकू) बरामद किए गए। इन्हें फॉरेंसिक लैब भेजा गया, जहां रिपोर्ट में मानव रक्त के धब्बे पाए गए। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। जिसमें पीड़िता ने अदालत में दोहराया कि पति ने उसे मारने की नीयत से हमला किया था। बचाव पक्ष के वकील ने जब पीड़िता से पूछा कि क्या वह चाहती है कि आरोपी को सजा मिले, जिस पर उसने जवाब दिया कि वह आरोपी के लिए कोई सजा नहीं चाहती और आरोपी ने जो सजा पहले ही भुगती है, वह काफी है, लेकिन फिर भी वह अपने बयान पर कायम रही। हालांकि अन्य गवाहों के विरोधाभासी बयान दिए, लेकिन चिकित्सकीय और फॉरेंसिक रिपोर्ट में डॉक्टर और फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने महिला के गर्दन पर धारदार हथियार और खून के धब्बों की पीडिता के खून से मेल खाता बताया गया। कोर्ट सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यह मामला झूठा है और पत्नी ने खुद चोट पहुंचाई ताकि आरोपी को फंसाया जा सके। गवाहों के विरोधाभासी बयान और परिस्थितियों के आधार पर उन्होंने आरोपी को निर्दोष बताया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने पत्नी को मारने की नीयत से हमला किया और यदि समय पर इलाज न होता तो उसकी मौत हो सकती थी।