कठुआ। जिला प्रधान सत्र न्यायाधीश ने एनडीपीएस अधिनियम मामले में आरोपी को सशर्त जमानत सुनाई है। आदेश के अनुसार, आवेदक को जमानत के लिए न्यायालय की संतुष्टि के लिए 25 हजार के निजी बांड सहित समान राशि की दो जमानतें प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी को निर्देश दिया है कि वह मामले की जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने में जांच प्राधिकारी के साथ पूर्ण सहयोग करेगा और किसी भी तरह से अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा। अगर आरोपी किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है तो अभियोजन पक्ष उसकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकता है।
कोर्ट में पुलिस की ओर से दायर रिपोर्ट के मुताबिक, शकील फरदोस पुत्र शेर अली निवासी बगियाल कठुआ को हटली पुलिस ने हेरोइन की तस्करी के आरोप में बीते महीने गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी के वकील ने कोर्ट में याचिका दायर कर उसकी जमानत की मांग की गई। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसका मुव्वकिल निर्दोष है और पुलिस ने उसे झूठे मामले में फंसाया है। अभियोजन पक्ष ने इस आधार पर जमानत देने का विरोध किया है कि जिस कथित अपराध के लिए अभियुक्त पर आरोप-पत्र दायर किया गया है, वह गैर-ज़मानती, जघन्य और समाज के विरुद्ध है। क्योंकि मामले की जांच अंतिम चरण में है। इसलिए अगर आरोपी को जमानत दी जाती है तो अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। लिहाजा उसकी जमानत अर्जी को खारिज करने की अपील की गई। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, आवेदक के कब्जे से बरामद हेरोइन की मात्रा केवल 6.06 ग्राम है, जो मध्यवर्ती मात्रा की श्रेणी में आती है। ऐसे में, एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 की कठोरता वर्तमान मामले में लागू नहीं होती है। इसलिए अभियुक्त को और अधिक हिरासत में रखना उचित नहीं है और इसके अलावा ऐसा करना दोषसिद्धि से पहले सजा देने के समान होगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद माना कि आरोपी के वकील द्वारा प्रस्तुत तर्क उचित हैं और स्वीकार किए जाने योग्य हैं। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को सशर्त जमानत का निर्देश सुनाया।