कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने आबकारी अधिनियम मामले में आरोपी को पांच साल बाद बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार, मामले की जांच एक ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा की गई है जोकि इस जांच को करने के लिए सक्षम नहीं था। इसके चलते आरोपी के दोषसिद्धि की संभावना नहीं है। लिहाजा मामले में दायर चालान को खारिज कर आरोपी को बरी करने का निर्देश दिया जाता है।
पुलिस की ओर से कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार, मामला वर्ष 2020 का है। इसमें आरोपी मंगल सिंह निवासी मीरपुर जग्गू नगरी को पुलिस ने अवैध रूप से शराब का कारोबार करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद कठुआ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 48 (ए) के तहत मामला दर्ज कर वर्ष 2021 में न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र दायर किए थे। 12 अप्रैल 2022 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए थे। इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, लेकिन अभी तक अभियोजन पक्ष ने आज तक कोई भी गवाह पेश नहीं किया है।
कोर्ट की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया कि क्योंकि मामले में जांच एक ऐसे पुलिस अधिकारी की ओर से की गई है जो कि आबकारी अधिनियम के तहत स्थापित नियमों के अनुसार करने के लिए सक्षम नहीं था। लिहाजा आरोपी को बरी करने की अपील की गई। जिसे कोर्ट ने मान लिया और आरोपी को बाइज्जत बरी कर दिया। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी के जमानती और व्यक्तिगत बांड को खारिज कर मामले में जब्त शराब को अपील की अवधि समाप्त होने के बाद नष्ट करने का आदेश दिया है।