कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने से हुई दुर्घटना मामले में आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। मामला नौ साल पुराना है। इसमें चढ़वाल स्थित चंदवां मोड़ पर दो कारों के बीच हुई टक्कर में एक कार में सवार चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आदेश के अनुसार, अभियोजन पक्ष अभियुक्त के खिलाफ अपना मामला साबित करने में विफल रहा है। अभियोजन पक्ष यह भी साबित करने में विफल रहा है कि आरोपी अपनी फिएस्टा कार लापरवाही से चला रहा था। लिहाजा आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया जाता है। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी की व्यक्तिगत और जमानत बांड को भी खारिज करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट में पुलिस की ओर से दायर रिपोर्ट के अनुसार, मामला 17 जनवरी 2016 का है। इसमें आरोपी कार चालक अमन ताज सिंह पुत्र दीदार सिंह निवासी सैनिक कॉलोनी जम्मू पर आरोप था कि वह घटना के दिन अपनी कार को लापरवाही और तेज गति से चला रहा था। इसके बाद चढ़वाल स्थित चंदवा मोड़ पर आरोपी ने अपनी कार से खड़ी कार को टक्कर मार दी थी। इसमें ऑल्टो कार का चालक सहित उसके परिवार में उसकी पत्नी और दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद चढ़वाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की थी।
आरोपी ने 25 जुलाई 2016 को कोर्ट में अपने बयान में दोषी नहीं होने की दलील दी थी और मांग की थी कि वह मामला लड़ना चाहता है। अभियोजन पक्ष को मामले में गवाहों को पेश करने का निर्देश दिया गया था। अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों में से पांच गवाहों की जांच की। जिन्हें अभियोजन पक्ष ने घटना के प्रत्यक्षदर्शी बताया था। कोर्ट ने पाया कि सभी गवाहों में से सिर्फ एक गवाह ने ही कहा कि आरोपी की कार कठुआ की तरफ आ रही थी और जम्मू की ओर जा रही थी। सभी प्रत्यक्षदर्शियों गवाहों ने कहा कि दुर्घटना चंदवां मोड़ पर हुई, लेकिन मामले के जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में किसी भी मोड़ का उल्लेख नहीं किया है और न ही किसी गवाह ने बताया कि घटना के समय आरोपी अपनी कार लापरवाही और तेज गति से चला रहा था। उन्होंने सिर्फ एक अस्पष्ट बयान दिया कि कार तेज गति से थी। उन्होंने यह नहीं बताया कि आरोपी किस तरीके से गाड़ी चला रहा था। कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त पर लापरवाही से गाड़ी चलाने का आरोप साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष को तीन बातें साबित करनी चाहिए थीं कि दुर्घटना वास्तव में हुई थी। दुर्घटना लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हुई थी और अभियुक्त ही वह व्यक्ति था जो प्रासंगिक समय पर वाहन चला रहा था लेकिन अभियोजन पक्ष ऐसा करने में विफल रहा है। लिहाजा आरोपी को बरी करने का निर्देश दिया जाता है।