कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने लड़की के अपहरण और उसकी जबरन शादी करवाने के मामले में आरोपी को सशर्त जमानत दी है। आदेश के अनुसार, आरोपी को जमानत के लिए 15 हजार रुपये की जमानत बांड कोर्ट के समक्ष पेश करने के साथ-साथ समान राशि का व्यक्तिगत बांड जेल अधीक्षक के सामने पेश करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा आरोपी को जांच अधिकारी से सहयोग करने और अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित न करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस की ओर से दायर मामले के अनुसार, अर्शदीप सिंह निवासी रूपैनवाला फरीदकोट (पंजाब) पर आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता की बेटी का अपहरण कर भाई से जबरन शादी करवाई थी। जिसके बाद पुलिस ने कठुआ थाना में शिकायतकर्ता की शिकायत पर मामला दर्ज किया था।
आरोपी गत 31 दिसंबर से न्यायिक हिरासत में है। हालांकि आवेदक के भाई और शिकायतकर्ता की बेटी की शादी हो चुकी है।
आरोपी के वकील ने मामले में जमानत लेने के लिए बीते 5 फरवरी को आवेदन किया था। इसकी सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कहा कि उसका मुव्वकिल निर्दोष है। पुलिस ने उसे झूठे मामले में फंसाया है। लिहाजा उसे जमानत दी जाए। इसका अभियोजन पक्ष की ओर विरोध किया गया। कहा कि आरोपी द्वारा किए गए अपराध जघन्य और गैर-जमानती हैं। लिहाजा वह जमानत का दावा नहीं कर सकता है। आरोपी ने एक मासूम असहाय लड़की को अगवा किया है। अभियोजन पक्ष के वकील ने कहा कि आरोपी जम्मू-कश्मीर का रहना वाला नहीं है। ऐसे में आरोपी को जमानत देते है, तो इस बात की संभावना है कि वह न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से फरार होने का प्रयास भी कर सकता है। इसलिए इसकी जमानत को खारिज किया जाए। इसके बाद आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि मामले में कथित अपहृत लड़की को अभी तक बरामद नहीं किया है। इसके अलावा यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि आवेदक के भाई और लड़की को फरीदकोट की अदालत की ओर से सुरक्षा प्रदान की गई है, क्योंकि कथित अपहृत लड़की के परिवार के सदस्य उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप कर रहे हैं और उन्हें परेशान कर रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में आरोपी को सशर्त जमानत का निर्देश दिया। इसके अलावा कोर्ट ने जिला जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि आरोपी का 15 हजार का निजी मुचलका प्राप्त करने के बाद उसे तुरंत रिहा कर दिया जाए।