कठुआ। जिला सत्र न्यायाधीश ने एनडीपीएस अधिनियम के मामले में आरोपी को सशर्त जमानत सुनाई है। आदेश के अनुसार, आरोपी को जमानत के लिए 50 हजार का निजी मुचलका सहित समान राशि के दो जमानतदारों को प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा आरोपी को जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए जांच अधिकारी से सहयोग करने और अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित न करने का निर्देश दिया जाता है। अगर आरोपी किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है तो अभियोजन पक्ष उसकी जमानत रद्द करने की मांग अदालत से कर सकता है।
एफआईआर के मुताबिक, राजबाग पुलिस ने आरोपी मोहम्मद सलीम निवासी बाहु फोर्ट जम्मू को हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। मौके पर उसके पास से 9.01 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। इसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस की धारा 21 और 22 के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी। आरोपी की ओर से अदालत के समक्ष बीते 16 जनवरी को जमानत के लिए याचिका दायर की गई। इसकी सुनवाई के दौरान, आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसका मुव्वकिल निर्दोष है। पुलिस ने उसे झूठे मामले मेें फंसाया है।
इसका अभियोजन पक्ष की ओर से विरोध किया गया। कहा कि आरोपी के खिलाफ दायर आरोप-पत्र गैर-जमानती, जघन्य और समाज के खिलाफ है। चूंकि मामले में कार्यवाही शुरू होने वाली है। ऐसे में आरोपी को जमानत मिलती है तो उसके द्वारा अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके बाद आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी से बरामद पदार्थ मध्यवर्ती मात्रा की श्रेणी में आता है। इसके लिए एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 की कठोरता वर्तमान मामले में लागू नहीं होती है। लिहाजा आरोपी को जमानत दी जाए। जिसे कोर्ट ने मान लिया और मामले में आरोपी को सशर्त जमानत सुनाई गई।