कठुआ। जिले में प्री मानसून के शुक्रवार को दस्तक देने की संभावना है। वीरवार सुबह हल्की बारिश ने तापमान में भले ही मामूली गिरावट दर्ज करवाई, लेकिन उमस और नमी ने लोगों की परेशानी में कोई कमी नहीं आने दी। दोपहर तक जहां आसमान पर बादल छाए रहे वहीं दोपहर बाद तेज धूप से पारा फिर चढ़ता नजर आया।
बीती रात से बदले मौसम के मिजाज के कारण मध्य रात्रि के बाद शहर व आसपास के कई इलाकों में हल्की बारिश दर्ज की गई। इससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। मौसम कुछ देर के लिए सुहावना तो हुआ, लेकिन दिन चढ़ने के साथ सुबह से आसमान में छाए बादलों के कारण बढ़ी उमस दिन भर लोगों के पसीने छुड़ाती रही। इससे कामकाजी वर्ग दिन भर परेशान दिखा। मौसम में आए बदलाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस मौसम में अधिकतम तापमान का आंकड़ा 45 डिग्री तक पहुंचने वाले शहर में वीरवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री तक दर्ज किया गया। लेकिन आसमान में घने बादल होने के बावजूद बारिश न होने से आर्द्रता बढ़ती गई। इससे वातावरण में नमी 70 से 80 प्रतिशत के बीच बनी रही और हीट इंडेक्स 42 डिग्री तक पहुंच गया। जो दिन भर लोगों को पसीना पोछने के लिए मजूबर करता रहा। वहीं इससे बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्थमा रोगियों को असहजता महसूस हुई।
कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ के प्रमुख डॉ विशाल महाजन ने बताया कि प्री मॉनसून यानि कि पैड छल्ला के शुक्रवार से जिले में दस्तक देने की संभावना है। इससे पारे में गिरावट होगी हालांकि हवा में नमी की मात्रा भी बढ़ने की उम्मीद है।
कोट
उमस भरी गर्मी न केवल असहजता बढ़ाती है, बल्कि यह कई स्वास्थ्य समस्याओं और चर्म रोगों को भी जन्म देती है। इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। उमस से डिहाइड्रेशन, हीट एक्सॉशन और हीट स्ट्रोक, उल्टी-दस्त के साथ सिरदर्द और थकान जैसी स्वास्थ्य समस्याएं आ सकती हैं। इसके अलावा कई तरह के त्वचा संबंधी रोग भी हो सकते हैं। इसमें घमौरियां, फंगल इंफेक्शन के साथ सनबर्न और स्किन टैनिंग की समस्या आ सकती है। ऐसे समय में हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए दिन में 8–10 गिलास पानी के साथ नारियल पानी और ओआरएस का सेवन करें। वहीं, भोजन भी हल्का और सुपाच्य लें, जिसमें ताजे फल, सलाद और ठंडी तासीर वाले पेय फायदेमंद हैं। यदि किसी को लगातार बुखार, उल्टी, चक्कर या त्वचा पर गंभीर चकत्ते दिखाई दें, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
-डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री, प्रधानाचार्य जीएमसी कठुआ