कठुआ। जिले में पिछले दो सालों के दौरान मलेरिया से पीड़ित मरीजों का आंकड़ा इकाई अंकों में सिमट कर रह गया है। हालांकि इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग इसके खिलाफ अपनी सक्रियता को जारी रखे है।
शुक्रवार को विश्व मलेरिया दिवस पर जिला स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को मलेरिया के खिलाफ जागरूक करने के चलाए जाने वाले अभियान की रूपरेखा तय की है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विंग की टीम स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों व अन्य ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों तक जागरूक करने पर विचार कर रहा है। जहां से विभाग का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।
दरअसल जिले में हर साल सैकड़ों लोगों को अपनी चपेट में लेने वाले मलेरिया के मामलों में कमी आती जा रही है। पिछले दो सालों में मलेरिया के मरीजों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो लगभग सात लाख की आबादी वाले जिले में मरीजों की संख्या दहाई तक भी नही पहुंच पाई है। स्वास्थ्य विभाग इसे लगातार चलाए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रमों का नतीजा बता रहा है।
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विश्व मलेरिया दिवस: जागरूकता और बचाव के लिए एकजुट प्रयास
विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना और इसके रोकथाम के उपायों को बढ़ावा देना है। मलेरिया एक संक्रामक रोग है, जो मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी शामिल है। समय पर इलाज न होने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।
रोकथाम के उपाय
- मच्छरदानी का उपयोग करें।
- स्थिर पानी के स्रोतों को हटाएं।
- कीटनाशक का छिड़काव करें।
- पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।