कठुआ। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए शारदीय नवरात्र में रामलीला मंचन किया जाता है। पहले चैत्र नवरात्र के साथ ही बसोहली के धार महानपुर में चार दशक पुरानी रामलीला का मंचन पूरे उत्साह के साथ शुरू कर दिया गया है।
खास बात है कि ऐतिहासिक नगरी बसोहली के धार महानपुर इलाके में चैत्र नवरात्र पर रामलीला का मंचन वर्ष 1986 से किया जा रहा है। रामलीला का मंचन शहतीर और तिरपाल से बने मंच से शुरू हुआ जो वर्तमान में पक्के मंच और मैदान की सुविधा से लैस हो चुका है। चैत्र नवरात्र की इस रामलीला में पचास पात्र अलग-अलग रोल अदा करते हैं। पात्रों का मानना है कि रामलीला का मंच न सिर्फ मनोरंजन करता है, बल्कि इसमें हिस्सा लेने वाले कलाकाराें और देखने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं भी पूर्ण करता है।
कई वर्ष तक रामलीला मंचन में आवाज के जादू से भक्ति भाव बढ़ाने वाले लेखराज वर्मा बताते हैं कि चैत्र नवरात्र पर्व पर रामलीला का मंचन देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। धार महानपुर परिवहन सुविधा के लिहाज से आखिरी स्टेशन है। इसके बावजूद झेंखर, खोली तलाई, धार कोर, केर धन्नी, सिमनी, नक्की, हदाट, पनार, बरसोटा, खंडला, कुरमाल, कुटली, जोला और खलंकर जैसे सुदूरवर्ती इलाकों से लोग पैदल चलकर रामलीला देखने आते हैं। उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्र के दौरान मौसम खराब होता है। इसके चलते रामलीला को पंद्रह से बीस दिन लगते हैं। फिर भी कलाकारों और दर्शकों में उत्साह कम नहीं होता। उधर, धार महानपुर के अलावा बनी सब डिवीजन के कई गांवों में भी चैत्र नवरात्र में रामलीला का मंचन किया जाता है।
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रामजी की बरसती है कृपा
स्थानीय लोग मानते हैं कि चैत्र नवरात्र के दौरान धार महानपुर की रामलीला में मंचन करने वाले कलाकारों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसा माना जाता है कि रामलीला के विभिन्न किरदारों को निभाने वाले युवा इसे मन्नत के रूप में निभाते हैं और उनकी मनोकामना पूरी भी होती है।
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