कठुआ। जिले के भरमोरा में चल रही फ्रूट और सब्जी मंडी में न तो एटीएम है और न ही बैंकिंग और न ही कैंटीन की कोई सुविधा है। ऐसा तब है जब इस मंडी में रोजाना लाखों का कारोबार होता है। एक हजार से ज्यादा लोग मंडी में रोजाना पहुंचते हैं, लेकिन यहां कैंटीन की भी कोई सुविधा नहीं है।
वर्ष 2018-19 में तत्कालीन डीसी रोहित खजूरिया के आदेश के बाद जेल रोड से बरमोरा में शिफ्ट की गई सब्जी मंडी में कारोबारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। मंडी में कारोबार कर अपने परिवार का गुजारा चलाने वाले नौ दुकानदारों को जहां आज तक दुकान बनाने के लिए जमीन आवंटित नहीं की गई है। वहीं जिन दुकानदारों के पास अपनी दुकान है वह भी मंडी को संचालित करने वाले बागवानी विभाग पर इस मामले में गंभीरता न दिखाने की बात कह रहे हैं।
मंडी में दुकान न होने से परेशान कारोबारियों का कहना है कि दुकान न होने के कारण वह अपने कारोबार को बढ़ा नही पा रहे हैं, क्योंकि सब्जी के कारोबार में कई बार लाया गया माल बच जाता है। उसे रखने के लिए उनके पास कोई स्थान न होने के कारण फेंकने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इससे होने वाले नुकसान के डर के कारण वह लोग थोड़ा ही समान मंगवाते हैं। ऐसे हालात के कारण उनका लाभांश भी काफी कम होता है जो परिवार के गुजारे में ही खत्म हो जाता है।
दरअसल मंडी को जब शिफ्ट किया गया था तो यहां 63 दुकानों के लिए जमीन का आवंटन हो चुका था। जिसमें कठुआ के लोगों को प्राथमिकता देने के बजाय दियालाचक और जम्मू के कारोबारियों को भी दुकान उपलब्ध कराई गई। इसके बाद कठुआ के नौ वंचित दुकानदारों ने भी इसके लिए आवेदन किया। इन दुकानदारों से दुकान के लिए जमीन दिए जाने के नाम पर 80 हजार रुपये जमा करवा लिए गए, लेकिन आज तक उन्हें दुकान मयस्सर नहीं हुई। वहीं मंडी की व्यवस्था को लेकर उन दुकानदारों में भी भारी निराशा है, जिनके पास अपनी दुकान है। सब्जी और फल के कारोबार से जुड़े इन लोगों ने अपनी समस्याओं के लिए बागवानी विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। इसके लिए वह गंभीर नहीं है।
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भरमोरा में जब मंडी शिफ्ट की गई थी, उस वक्त यहां 63 दुकानें थीं। इन दुकानों को जेल रोड पर अपना कारोबार करने वाले लोगों को आवंटित किया जाना था। लेकिन, इसमें बनी हुई दुकानों को हीरानगर और जम्मू तक के लोगों को आवंटित कर दिया गया। जिन्होंने इन दुकानों को किराए पर चढ़ा दिया है। जहां एक दुकान की आड़ में दो लोग कारोबार कर रहे हैं। जबकि एक दुकान पर एक ही कारोबारी होना चाहिए। इससे बढ़ी प्रतिस्पर्धा के कारण लाभ कम हो गया है जबकि खर्च बढ़ता जा रहा है।
-बोधराज, फल कारोबारी
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मंडी में आज भी नौ दुकानदार होलसेल सब्जी व्यापारी की जगह एक फड़ी दुकानदार की तरह काम कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें 80 हजार रुपये जमा करने के बावजूद आज तक पक्की दुकानों की व्यवस्था बागवानी विभाग द्वारा नहीं की गई है। पक्की दुकान न होने के कारण उनकी मुख्य समस्या यह है कि वह किसी भी माल को जरूरत से ज्यादा नहीं मंगवा सकते हैं। क्योंकि अगर वह बच गया तो उसको रखने के लिए उनके पास कोई जगह नहीं है।
-तरसेम लाल, सब्जी कारोबारी।
शहर की जेल रोड स्थित मंडी में जब कारोबार होता था, तब सब कुछ ठीक था, लेकिन बरमोरा सब्जी मंडी में आने के बाद से स्थितियां बहुत ज्यादा बदल गई हैं। हालत यह है कि वार्षिक मंडी शुल्क के रूप में हर साल 2500 रुपये अदा करने के बावजूद उन्हें आज तक न दुकान मिली है। उनके पास न बिजली की व्यवस्था है और न ही पानी की कोई व्यवस्था है। ऐसे में सिर्फ रोज सुबह आकर फड़ी लगाना नियति बन गई है।
-शबल गुप्ता, सब्जी कारोबारी।
करीब 25 लाख का प्रतिदिन कारोबार करने वाली मंडी में न तो एटीएम की सुविधा है और न ही बैंक का कोई काउंटर उपलब्ध है। मंडी में सुबह 5 बजे से कारोबार शुरू होता है। इसमें करीब एक हजार लोगों का मंडी पहुंचना होता है। इसमें कारोबारी से लेकर ग्राहक, मजदूर और वाहन चालक शामिल होते हैं। इसके लिए आज तक कैंटीन की भी व्यवस्था नहीं की गई है, जबकि ऐसी सुविधाएं हर मंडी में होती हैं।
-दर्शन लाल, सब्जी दुकानदार
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कोट
जिन नौ दुकानदारों को अब तक दुकान के लिए जमीन अलाट नही हुई है, उनकी रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। मंडी में समय-समय पर जो भी विकास के काम की जरूरत होती है उसे करवाया जाता है। गत दिनों नया बोर और शौचालय का नवीनीकरण करवाया गया है। इसके अलावा मंडी में बैंक की शाखा खोलने के लिए भी अधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
-शिव रत्न शर्मा, एजीएमओ, बागवानी योजना एवं विपणन विभाग