गुड़ा कल्याल स्थित महादेव मंदिर।
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कठुआ। तपोभूमि बिलावर में महादेव के कई प्राचीन मंदिर हैं। उन्हीं में से रामकोट के गुड़ा कल्याल स्थित बनी महादेव मंदिर का महत्व है। भोलेनाथ के दर्शन मात्र से जहां कष्टों का नाश होता है वहीं मान्यता है कि मंदिर परिसर में स्थित चार सौ साल पुराने चंपा के पेड़ की पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है। यह भी माना जाता है कि बिलावर के बिल्केश्वर महादेव मंदिर की ही तरह इस मंदिर का निर्माण भी पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान ही किया था।
किवदंती के अनुसार हजारों साल पहले इस मंदिर की जगह एक बहुत घना जंगल था। यहां बेल के पेड़ सबसे अधिक थे। इस कारण यहां का नाम बनी गुड़ा कलाल पड़ा। एक समय की बात है कि गद्दी समुदाय के लोग भेड़-बकरियों को चरा रहे थे, तो उन्हें कुछ आवाजें सुनाई दीं। जब उन्होंने आवाजों पर ध्यान दिया तो उन्हें वहां शिव मंदिर दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने इसकी जानकारी लोगों को दी। मंदिर की मान्यता है कि इसके प्रांगण में एक 400 साल पुराना चंपा का पेड़ है, जिसकी पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है। जब लोगों की मन्नत पूरी होती थी तो कुछ लोग भूमि दान करते थे। इस वजह से मंदिर के नाम तीन सौ कनाल भूमि है। मंदिर के बाहर एक नंदी बैल और भैरव की मूर्ति है, जहां पर भी लोग मन्नत मांगते हैं। इसके साथ ही गद्दी समुदाय के लोगों की दो समाधियां हैं, जो गुरु चेले थे। कुछ विद्वानों का कहना है कि पहले यहां शिवजी की एक विशाल मूर्ति थी।