26 दिन की हड़ताल के बाद सफाई व्यवस्था में जुटे कर्मचारी, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
एनजीटी के निर्देशों के बावजूद खुले में कचरा जलाए जाने पर लोगों ने जताई चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। नगर परिषद कर्मचारियों की 26 दिनों तक चली हड़ताल समाप्त होने के बाद शहर में जमा कचरे को हटाने का अभियान शुरू कर दिया गया है। हाल यह है कि कई स्थानों पर लगे कूड़े के ढेर को उठा नहीं जा रहा है तो लोग इसे जला रहे हैं। हालांकि, इससे पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।
शहर में प्रतिदिन लगभग 35 टन ठोस कचरा निकलता है। 26 दिनों की हड़ताल के दौरान करीब 910 टन कचरा विभिन्न स्थानों पर जमा हो गया था। अब इस कचरे के निस्तारण के लिए नगर परिषद की ओर से सफाई अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन कई जगहों पर कचरे को उठाने के बजाय आग लगाकर नष्ट किया जा रहा है।
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य संजीव कुमार वैद्य के अनुसार, खुले में कचरा जलाने से वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा सूक्ष्म प्रदूषक कण बड़ी मात्रा में फैलते हैं। प्लास्टिक, रबर और अन्य ठोस अपशिष्ट के जलने से निकलने वाली जहरीली गैसें श्वसन संबंधी रोगों, आंखों में जलन, एलर्जी तथा हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
स्थानीय अरुण कुमार शर्मा का कहना है कि शहर को स्वच्छ बनाने की प्रक्रिया स्वागत योग्य है, लेकिन सफाई के नाम पर कचरे को जलाना समस्या का समाधान नहीं है। उनका कहना है कि प्रशासन को जमा हुए कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि सफाई अभियान के साथ-साथ पर्यावरण और जनस्वास्थ्य भी सुरक्षित रह सके।
उन्होंने जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर खुले में कचरा जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
क्या कहता है एनजीटी
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से खुले में कचरा जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। एनजीटी ने कई मामलों में स्पष्ट किया है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के तहत कचरे का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, पृथक्करण और निस्तारण किया जाना चाहिए। खुले में कचरा जलाना पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
वर्जन
26 दिनों से जारी हड़ताल के बाद शहर की सफाई में कर्मचारी जुटे हैं। सुबह से लगातार मॉनीटरिंग की जाती है। शहर में जारी हड़ताल के दौरान लोगों ने खाली पड़े प्लाटों में कचरा फेंकना शुरू कर दिया था। चूंकि नगर परिषद का फोकस अभी शहर के उन स्थानों की सफाई पर है, जहां सबसे ज्यादा लोगों का आना-जाना होता है। ऐसे में कुछ लोग अपने आसपास जमा कचरे को खुद आग लगा रहे हैं। नगर परिषद के सफाई कर्मचारी उसे बुझाकर वहां से भी कचरा हटा रहे है। लोगों से अपील की जाती है कि वह कचरे को जलाने के बजाय धैर्य रखें, क्रमवार पूरे शहर को स्वच्छ बनाया जाएगा। - अमित शर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद कठुआ