सरकार का फैसला महंगाई की मार झेल रहे लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने के समान
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में गत शुक्रवार को प्रदेश कैबिनेट ने यात्री वाहनों में किराया वृद्धि के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक यात्री वाहनों के किराया दर में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी होने जा रही है।
वर्ष 2021 के बाद जम्मू-कश्मीर में किराया दर में इतनी वृद्धि पर आम लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। लोगों का कहना है कि इस तरह के फैसले पहले ही महंगाई की मार झेल रहे लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने के समान है। सरकार को पहले लोगों की आय के बढ़ने का इंतजार करना चाहिए था
बता दें कि विभिन्न ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने मौजूदा किराया दरों में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की मांग कर सरकार को एक ज्ञापन दिया था। किराया दरों में वृद्धि के संदर्भ में गठित समिति की रिपोर्ट और आम जनता पर पड़ने वाले भार को देखते हुए परिवहन विभाग ने 18 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट को भेजा था जिसे कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में यात्री किराये का बढ़ना तय है।
ऐसा लगता है कि सरकार भी आपदा में अवसर तलाश रही है। अभी हाल में ही रसोई गैस के सिलिंडरों में 50 रुपये की वृद्धि हुई है और उसकी उपलब्धता भी सुलभ नहीं हो पा रही है। व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने के बजाय एक और महंगाई का बम फोड़ दिया है।
- मनोहर सिंह, वरिष्ठ नागरिक
मौजूदा समय में यात्री किराया, सिलिंडरों या खाद्य सामग्री का मूल्य बढ़ाने के बजाय लोगों की आमदनी के जरिए को बढ़ाने की जरूरत है। एक साथ 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी आम आदमी की कमर तोड़ने जैसा है। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।
- रणदीप सिंह, स्थानीय
जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी चरम पर है। मौजूदा समय में सार्वजनिक क्षेत्र के यात्री वाहनों का ज्यादातर उपयोग गरीब और मध्यम वर्ग के लोग ही करते हैं। सरकार को पहले यह सुनिश्चित बनाना चाहिए था कि इस वर्ग के लोगों की आमदनी को बढ़ाया जाए और इसके बाद इस तरह की वृद्धि की जानी चाहिए।
- निर्दोष शर्मा, कांग्रेस नेता
मनोहर सिंह, वरिष्ठ नागरिक
मनोहर सिंह, वरिष्ठ नागरिक