हाइवे से निर्माण सामग्री लेकर गुजरते वाहन, जिसमें नंबर प्लेट और संकेतक का उपयोग नही किया जा रहा
दृश्यता कम होने के कारण सड़क सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत
कठुआ। सर्दी के मौसम में जिले में धुंध का कहर जारी है। दृश्यता कम होने के कारण सड़क सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। हकीकत यह है कि हाईवे और लिंक मार्गों पर दौड़ रहे भारी-भरकम डंपर व अन्य व्यावसायिक वाहन यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। इनमें न पीछे संकेतक हैं न बैक लाइट और न ही स्पष्ट नंबर प्लेट। ऐसे वाहनों की लापरवाही कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
जिले के हाईवे से लेकर लिंक मार्गों पर तेज रफ्तार से दौड़ते डंपरों और ट्रलियों में पीछे संकेतक नहीं होते। अधिकांश वाहनों की नंबर प्लेट या तो ढकी होती है या इस तरह लगाई जाती है कि पहचान मुश्किल हो। सैकड़ों की संख्या में दौड़ने वाले इन डंपरों में निर्माण सामग्री को ढककर ले जाने का प्रावधान भी चालक नहीं मानते। धुंध और ठंड के मौसम में सड़क सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है। बैक लाइट और रिफ्लेक्टिव टेप न होने से कोहरे में ये वाहन दिखाई नहीं देते। पुराने और जर्जर वाहनों की हालत भी खराब है जिनकी फिटनेस जांच हर साल जरूरी है लेकिन इसका पालन बहुत कम चालक करते हैं। कई वाहन चालक पुराने फिटनेस प्रमाणपत्र लेकर ही चलते हैं।
स्थानीय युवा दिनेश कुमार का कहना है कि डंपर और ट्रैक्टर-ट्राली चालक बिना ढकाव के निर्माण सामग्री ढोते हैं जिससे सड़क पर धूल और पत्थर गिरते हैं और दुर्घटना की संभावना और बढ़ जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पर कोई कार्रवाई न होना परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। पुलिस नाके पर दोपहिया चालकों पर कार्रवाई करती है, लेकिन भारी वाहनों को नजरअंदाज कर देती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सड़क सुरक्षा माह मनाया जा रहा है। सड़क सुरक्षा को लेकर जहां एक ओर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। डंपर चालकों को बैक लाइट, रिफ्लेक्टिव टेप और संकेतकों से कोई लेना-देना नहीं है और सड़क पर नियमों की अनदेखी आम हो गई है।
हाइवे से निर्माण सामग्री लेकर गुजरते वाहन, जिसमें नंबर प्लेट और संकेतक का उपयोग नही किया जा रहा