पत्रकारवार्ता को संबोधित करते पूर्व वनमंत्री चौधरी लाल सिंह। संवाद
कठुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना में किए जा रहे बदलावों के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी ने विरोध दर्ज कराया है।
रविवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में मनरेगा बचाओ संग्राम कोऑर्डिनेशन कांग्रेस कमेटी की बैठक आयोजित की गई जिसमें आगामी जनजागरूकता कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद जिला कांग्रेस कमेटी के प्रधान पंकज डोगरा ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण जीवन की रीढ़ है। संसद में पारित अध्यादेश के तहत हर ग्रामीण को सौ दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया गया था जिससे गांवों में विकास कार्य भी हो रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने योजनाओं और परियोजनाओं के नाम बदलकर जनता को भ्रमित किया है और अब रोजगार की इस गारंटी को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री चौधरी लाल सिंह ने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार ने मनरेगा जैसे जनहितकारी कानून को योजना का रूप दिया जो सीधे तौर पर इसे कमजोर कर ग्रामीणों के साथ अन्याय किया गया है। अब इसे राज्यों की इच्छा पर छोड़ा जा रहा है। पहले मनरेगा में काम करने वाले मजदूर की मजदूरी में 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार देती थी। अब नई योजना में राज्यों की देनदारी 40 प्रतिशत कर दी गई है।
देश में कई राज्य ऐसे है जो इस बोझ को नहीं उठा सकते हैं ऐसे में वहां इस योजना का भविष्य क्या होगा। मनरेगा के तहत होने वाले विकास के कार्य की पेमेंट अभी तक जारी नहीं हुई है सरकार ने यह नहीं बताया कि पुरानी पेमेंट किस तरह से अदा की जाएगी। अब एक नई योजना शुरू कर दी गई। उन्होंने कहा कि जिस मनरेगा योजना के तहत लोगों ने अपने गांवों और गलियों में काम किया, मजदूरी प्राप्त की और विकास को आगे बढ़ाया।