कठुआ। हीरानगर के गांव बनैड़ में जारी श्रीमद्भागवत कथा संपन्न हो गई। कथा के अंतिम दिन कथावाचक पंडित नागरमल शास्त्री ने श्रद्धालुओं को परीक्षित का राज तथा परिवार से मोह समाप्त होने का वर्णन सुनाया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण एक ऐसा ग्रंथ है। जिसके श्रवण मात्र से मानव के मन से मोह-माया और लोभ का अंत होता है और वह भगवान के परमधाम का अधिकारी बन जाता है।
उन्होंने कहा कि तक्षक सर्प ने परीक्षित को कथा के दौरान ही डसा। उसी समय राजा की मृत्यु हो गई। परंतु कथा सुनने से परीक्षित का ध्यान संसार से हटकर स्वर्ग के सुख में लीन था। परमात्मा का यह विधान है कि जो अंत समय में जिसमें भाव यानि आस्था रखकर स्मरण करता है, वह उसी को प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण के श्रवण से हमारे जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है और ज्ञान चक्षु खुल जाते हैं। यह हमें सांसारिक मोह माया से मुक्त करने में सहयोग करते हैं। लिहाजा हमें भागवत कथा का श्रवण पूरी निष्ठा और ध्यान से करना चाहिए, ताकि हमारे जीवन में इस धाम की कठिनाइयों का नाश हो और परमधाम में भगवान श्रीहरि के चरणों में स्थान मिल सके। अंत में कथा में उपस्थित सभी हरि भक्तों ने सामूहिक आरती में भाग लिया और प्रसाद वितरण किया।