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Kathua News: धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 60 हजार मीट्रिक टन किया

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एफसीआई ने जम्मू संभाग के लिए वार्षिक खरीद लक्ष्य 36 हजार मीट्रिक टन किया था, जम्मू संभाग के धान उत्पादकों को मिलेगी राहत
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जम्मू संभाग के धान उत्पादकों के लिए यह खबर राहत देने वाली है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए धान खरीद का लक्ष्य बढ़ा दिया है। यह लक्ष्य 36 हजार मीट्रिक टन से बढ़ाकर 60 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया है। इस फैसले से कठुआ, सांबा और जम्मू के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज बेचने में मदद मिलेगी।
पहले भारतीय खाद्य निगम ने जम्मू संभाग के लिए वार्षिक खरीद लक्ष्य 60 हजार मीट्रिक टन से घटाकर 36 हजार मीट्रिक टन कर दिया था। इस बदलाव के कारण धान खरीद केंद्रों पर खरीद प्रभावित हुई। किसानों को अपनी फसल बेचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। किसान अपनी उपज निजी व्यापारियों को 2000 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचने को मजबूर थे। उन्हें सरकारी खरीद में बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद थी। किसानों ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया था। जनप्रतिनिधियों ने भी खरीद लक्ष्य बढ़ाने की मांग उठाई थी।
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केंद्र सरकार की मंजूरी
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने किसानों की मांग स्वीकार कर ली है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने खरीद लक्ष्य बढ़ाने की आधिकारिक मंजूरी जारी कर दी है। यह निर्णय किसानों के विरोध और जनप्रतिनिधियों की लगातार मांग के बाद लिया गया है। इससे जम्मू संभाग के हजारों धान उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। अब वे अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे।

किसानों को मिलेगा बेहतर मूल्य
खरीद लक्ष्य बढ़ने से किसानों को अपनी धान की फसल सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचने में राहत मिलेगी। सरकारी खरीद के तहत धान की सामान्य किस्म के लिए 2440 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य निर्धारित है। वहीं, ग्रेड-ए धान के लिए 2460 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य तय किया गया है। यह निजी व्यापारियों द्वारा दिए जा रहे 2000 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से काफी अधिक है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल 400 से 500 रुपये का अतिरिक्त फायदा होगा।
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किसानों को करना पड़ रहा था दिक्कताें का सामना
यह बढ़ा हुआ लक्ष्य उन किसानों के लिए विशेष राहत लेकर आया है, जिनकी फसल तैयार होने के बावजूद सरकारी मंडियों में खरीद प्रभावित हो रही थी। उन्हें अपनी उपज बेचने में भारी दिक्कतें आ रही थीं। अब वे अपनी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेच पाएंगे। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। यह फैसला जम्मू संभाग के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
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