लखनपुर और अन्य माइनर पोस्टों पर खाद्य सामग्री की नियमित जांच की व्यवस्था नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जम्मू-कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर और अन्य माइनर पोस्टों पर खाद्य सामग्री की नियमित जांच न होने से घटिया गुणवत्ता और मिलावटी उत्पाद बेरोकटोक प्रदेश में दाखिल हो रहे हैं। इससे आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। करीब 17 साल पहले जिला विकास बोर्ड की बैठक में लखनपुर में फूड टेस्टिंग लैब स्थापित करने का प्रस्ताव पारित हुआ था, लेकिन अब तक इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया गया।
कठुआ और सांबा जिले में छोटे वाहनों से रोजाना बड़े पैमाने पर पंजाब से बनी मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थ पहुंचाए जा रहे हैं। 17 साल पहले जिला विकास बोर्ड की बैठक में लखनपुर में फूड टेस्टिंग लैब स्थापित करने का प्रस्ताव पारित हुआ था। यह मामला तत्कालीन सरकार को भेजा गया, लेकिन इस पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ। डेढ़ दशक बीतने के बावजूद न तो लखनपुर और न ही कठुआ में फूड टेस्टिंग लैब की स्थापना की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया है।
त्योहारों के सीजन में पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में घटिया, नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री पहुंच रही है। नियमित जांच न होने के कारण एफएसएसएआई के मानकों के अनुरूप उत्पाद भी इन क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं हो पाते। दूसरे राज्यों से तेल, दूध और अन्य डेयरी उत्पादों की भारी मात्रा में सप्लाई हो रही है, लेकिन उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। अटल सेतु बनने के बाद व्यवसायियों के लिए बिना जांच माल लाने का यह रूट दूसरा बड़ा माध्यम बन गया है, जहां से बसोहली, बनी और बिलावर-महानपुर के इलाकों में सामग्री पहुंचती है।
सूत्रों के अनुसार लखनपुर में कई बार खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए, जिनमें अधिकांश बार गुणवत्ता खराब पाई गई। डेढ़ दशक पूर्व 2.33 करोड़ की लागत से एक आधुनिक फूड टेस्टिंग लैब की स्थापना का प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा गया था। इसमें 11 श्रेणियों के खाद्य पदार्थों की जांच की व्यवस्था प्रस्तावित थी, लेकिन अब तक यह प्रस्ताव फाइलों में अटका हुआ है। सरकार ने सभी जिलों में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब स्थापित करने के दावे किए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि मोबाइल जांच लैब भी रोजाना सक्रिय नहीं हो पाती है। इसमें भी बुनियादी स्तर की जांच का ही प्रावधान है।
जब्त माल को रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज नहीं
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जब तक विभाग की जांच रिपोर्ट आती है, तब तक खाद्य सामग्री बाजार में पहुंच चुकी होती है और कई बार उपभोग भी हो चुकी होती है। ऐसे में जनता की सेहत के साथ हो रहा यह खिलवाड़ तत्काल रोकने के लिए सरकार को ठोस और स्थायी कदम उठाने की जरूरत है। अधिकारियों की मानें तो कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में जब्त माल को कहां रखा जाए यह एक बड़ा सवाल रहता है। सूत्रों ने बताया कि यदि जब्त माल को क्लीन चिट मिल जाए तो इस अवधि में उसके खराब होने की जिम्मेदारी कौन लेगा इसे लेकर भी अधिकारियों में असमंजस है। ऐसे में जब्ती सिर्फ सैंपल उठाने तक ही सीमित रहती है।