जम्मू-कश्मीर में हर साल 15 लाख भेड़ों की खपतजम्मू-कश्मीर में मीट की मांग ज्यादा है। खासकर कश्मीरी व्यंजनों में इसकी खपत ज्यादा होती है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक हर साल मीट के लिए 15 लाख से ज्यादा भेड़ों की मांग है। प्रदेश में 41 प्रतिशत मीट देश के अन्य हिस्सों से मंगाया जाता है।
इस पर 1400 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार ने समग्र कृषि विकास कार्यक्रम के तहत प्रदेश में ऊन और मटन की उत्पादकता बढ़ाने और आयात कम करने के लिए 329 करोड़ रुपये की पंचवर्षीय परियोजना मंजूर की है।
टैक्सेल भेड़ों की खासियतटैक्सेल घरेलू भेड़ की एक डच नस्ल है। यह मूल रूप से टैक्सेल द्वीप और नीदरलैंड के उत्तर तटीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं। टैक्सेल नस्ल की भेड़ों के सिर और पैर चिकने होते हैं। इसका कद छोटा, चेहरा चौड़ा, नाक काली और कान छोटे होते हैं। इस नस्ल की सबसे खास विशेषता यह है कि इसकी मांसपेशियां अन्य भेड़ों की तुलना में जल्दी विकसित हो जाती हैं।
राजबाग में क्वारंटीन सेंटर तैयार
इन भेड़ों के लिए राजबाग में क्वारंटीन सेंटर तैयार कर लिया गया है। क्वारंटीन किए जाने के बाद इन्हें रियासी के सरकारी भेड़ पालन फार्म पैंथल में रखा जाएगा। दस्तावेजी प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जल्द ही विशेषज्ञों की टीम ऑस्ट्रेलिया रवाना होगी। 'डॉ. आर के मन्हास, जिला भेड़पालन अधिकारी, कठुआ'