भाजपा के टिकट पर बसोहली सीट के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पूर्व सांसद लाल सिंह ने पहला रोड शो किया।राज्य के प्रवेशद्वार लखनपुर के रामलीला मैदान से प्रचार अभियान का आगाज किया। उन्होंने समर्थकों के साथ लखनपुर के अलावा बसंतपुर, महानपुर और बसोहली में जनसभाओं को संबोधित किया।
लखनपुर में पत्रकारों से मुखातिब लाल सिंह ने जहां राज्य से परिवारवाद की राजनीति के खात्मे का ऐलान किया तो महानपुर और बसोहली में भाजपा की सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगा। बसोहली के जीरो मोड़ पर उन्होंने पैदल मार्च शुरू कर दिया।
समर्थकों के साथ काफिला मुख्य बाजार में घूमते हुए रामलीला मैदान और उसके बाद पीर बाबा मैदान पहुंचा। कई जगह भारतीय जनता पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सिंह का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
इस अवसर पर लाल सिंह ने कहा कि बसोहली की विरासती पहचान को नए सिरे से जीवित किया जाएगा। छह वर्ष में विकास की जो रफ्तार धीमी पड़ी है उसे रफ्तार दी जाएगी। लाल सिंह ने कहा कि कसबे से लेकर गांव तक सबको विकास के मामले में बराबर की हिस्सेदारी देना उनकी प्राथमिकता है।
सिंह ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है। सरकारी मशीनरी की सुस्ती को वह दूर करना जानते हैं। इस अवसर पर वेद मनकोटिया, शिव कुमार पाधा, केवल कृष्ण, बलविंदर सिंह जबकि महानपुर में सुरिंदर गुप्ता, शाम सिंह, बिट्टू मंसोत्रा, कृपाल सिंह, शुकल, राम नरेश, कांता चौधरी आदि उपस्थित थे।
रणजीत सागर बांध प्रभावितों के लिए संघर्ष छेड़कर बसोहली से सियासत शुरू करने वाले लाल सिंह की पूरे दस साल के बाद कर्मभूमि में वापसी हो गई।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा बसोहली से उम्मीदवार घोषित होने के बाद लाल सिंह ने राज्य के प्रवेशद्वार लखनपुर से मिशन बसोहली के लिए कूच किया।
वर्ष 1996 और वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव जीतकर सिंह ने बसोहली सीट पर कब्जा जमाए रखा। वर्ष 2004 में संसदीय चुनाव जीतने के बाद सीट खाली हुई तो बसोहली पर सियासी पकड़ को साबित करते हुए लाल सिंह ने अपनी पत्नी कांता अंदोत्रा के लिए प्रचार किया और जीत दर्ज की।
इसके बाद से लाल सिंह की बसोहली वापसी नहीं हो पाई। पहले तिवारी कांग्रेस फिर कांग्रेस और अब भारतीय जनता पार्टी की टिकट से चुनावी मैदान में कूद रहे लाल सिंह की बसोहली वापसी से स्थानीय सियासत में नए समीकरण उभर आए हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में लाल सिंह की पत्नी कांता चौधरी न सिर्फ अपनी सीट बचाने में विफल रहीं थीं बल्कि वोट हासिल करने के मामले में तीसरे नंबर पर खिसक गई थीं। ऐसे में भाजपा के टिकट से लाल सिंह की वापसी से बसोहली की सियासत दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है।
दो दफा विधायक और दो दफा सांसद रह चुके लाल सिंह द्वारा कांग्रेस छोड़ने के बाद से ही भाजपा की टिकट से बसोहली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा था।
ऐसे में जब पूर्व सांसद ने बसोहली फतेह करने के मंसूबे से लखनपुर में प्रचार अभियान का आगाज किया तो बसोहली की सियासत में फिर से स्थानीय बनाम गैर स्थानीय उम्मीदवार का विषय बड़ा मुद्दा बन सकता है।