विधायक से मुलाकात...टैग
कठुआ जिले की जसरोटा सीट पहली बार अस्तित्व में आई और यहां से लोगों ने प्यार दिया। मैनें चुनाव प्रचार में देखा कि यहां दर्जनों गांव ऐसे हैं जिनकी सड़कों की दशा बहुत खराब है। कई गांवों में आज तक सड़क नहीं पहुंची है। इन गांवों का विकास करवाया, नए उद्योग लाकर युवाओं को रोजगार देना, इलाके को जल संकट से बाहर निकालना सरकार में रहते हुए प्राथमिकता रहेगी। भाजपा की टिकट से चुनाव जीते राजीव जसरोटिया ने क्षेत्र के विकास को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा की। साहिल खजूरिया से हुई उनकी बातचीत के प्रमुख अंश....
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सवाल - क्षेत्र में किन चुनौतियों को देखते हैं, इनसे पार पाने की क्या योजना है?
जनता ने मुझ पर भरोसा जताया, मैं इस खरा उतरने की कोशिश करूंगा। 40 दिन के प्रचार अभियान में लोगों की समस्याओं को करीब से देखा है। कंडी के रूप में जसरोटा इलाके को 70 साल पिछड़ा रखा गया। शाहपुर कंडी और उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना से इस इलाके को जलसंकट से बाहर निकालने की प्राथमिकता रहेगी। इन परियोजनाओं को जल्द पूरा करवाना पहला लक्ष्य रहेगा।
बेरोगारी कंडी का बड़ा मुद्दा है, इससे कैसे निपटेंगे?
सरकार ने औद्योगिक नीति इसलिए ही बनाई है कि सरकार पर युवाओं की निर्भरता कम हो। कठुआ और जसरोटा क्षेत्र औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो रहा है। कोशिश की जाएगी कि यहां और उद्योग आएं ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल पाए। आबादी वाले इलाकों में रेड केटागिरी के यूनिट न आएं, इसका पर भी ध्यान देंगे।
जसरोटा राजाओं की विरासत है, यहां पर्यटन के लिए कोई योजना है क्या?
हमारी सरकार ने पहले भी जसरोटा की खोई पहचान लौटाने पर फोकस किया है। इसीलिए इस विधानसभा क्षेत्र का नाम जसरोटा रखा गया है। यहां बेहतर तरीके से विकास किया जाएगा। यहां की धरोहरों को पर्यटन मानचित्र पर लाया जाएगा। जसरोटा की कृत्रिम झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करेंगे और इससे स्वरोजगार को बढ़ाएंगे।
क्या आप मानते है कि जम्मू-कश्मीर में ब्यूरोक्रेसी हावी थी?
जनता का नुमाइंदा हमेशा जनता को जवाबदेह है। ब्यूरोक्रेसी सिर्फ हावी नहीं रही बल्कि जनता बड़े हद तक इससे परेशान थी। अधिकारियों का माइंडसेट अलग है। अधिकारी तबादला ले लेते हैं लेकिन नुमाइंदे को लोगों के बीच ही रहना है। लोगों का प्रतिनिधित्व मिलने से लोगों को खुलापन मिलेगा।
एक वर्ग स्मार्ट मीटर, प्रॉपर्टी टैक्स का विरोध कर रहा है, उनके लिए कुछ सोच रखा है?
ब्यूरोक्रेसी की वजह से जनता और सरकार के बीच दूरी बढ़ गई थी। जम्मू-कश्मीर की पहचान लोक हितकारी राज्य के रूप में रही है। जहां भी जनता को चोट लगेगी या जिन मुद्दों से जनता प्रभावित होती है, उनको सरकार के सम्मुख उठाया जाएगा। निश्चित रूप से इन मुद्दों का हल निकालेंगे।
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विधायक का एजेंडा
पेयजल संकट से लोगों को निजात दिलाना
बोहड़ा समेत कई गांव ऐसे हैं जहां आज सड़क नहीं है। इन गांवों में सड़क पहुंचाना
जसरोटा में कृत्रिम झील और पार्क को पर्यटन मानचित्र पर लाना
उज्ज दरिया की बाढ़ से जमीनों को बचाना
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विद्यार्थी परिषद में रहे, पेशे से व्यवसायी
विद्यार्थी परिषद से राजनीति के सफर की शुरूआत करने वाले राजीव जसरोटिया पेशे से व्यवसायी हैं। उन्होंने भाजपा में जिला महामंत्री, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, प्रदेश सचिव, प्रदेश महासचिव के रूप में भी काम किया। कठुआ विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने और इसके बाद वन मंत्री के रूप में केबिनेट में शामिल हुए। उन्होंने ग्रेजुएशन की है।