हीरानगर। बिजली के टेढ़े खंभे और लटकते तार बिजली आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं, लेकिन बिजली निगम इस व्यवस्था को सुधारने के लिए गंभीर नहीं दिख रहा है। उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर लगाने के बजाय बेहतर बिजली सुविधा मांगी है।
अघोषित बिजली कटौती का सबसे बड़ा कारण कमजोर और लटकते उलझते बिजली के तार हैं। तेज हवा चलने या मामूली बारिश से उपमंडल के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है।
पूछने पर निगम के अधिकारियों का एक ही जवाब होता है कि तार उलझ गए हैं या तार टूट गए हैं लेकिन इस अव्यवस्था का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें पर्याप्त बिजली तो नहीं मिल रही है लेकिन घरों के बाहर चमचमाते नए स्मार्ट मीटर लगाने का काम लगातार जारी है। जिन इलाकों में यह मीटर लगाने का काम पूरा हो चुका है, वहां के लोगों ने नियमित बिजली आपूर्ति की मांग की है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि अगर स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं तो बिजली भी नियमित दी जानी चाहिए और अगर निगम नियमित बिजली देने में असमर्थ है तो फिर स्मार्ट मीटर लगाने का कोई औचित्य नहीं है।
स्थानीय निवासी पवन कुमार, अमन सिंह, लक्की शर्मा, अनिल कुमार आदि ने कहा कि उपमंडल के कई इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन पूरे उपमंडल में अगर बिजली के तारों और खभों की हालत बेहद खराब है। इस व्यवस्था को सुधारने के लिए निगम ने कुछ नहीं किया।
लोगों ने बताया कि बिजली के लटकते तार अक्सर खराबी का कारण बन रहे हैं। इस कारण कई इलाकों में बिजली बंद रहती है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में तो दूर शहरी इलाके या कस्बों में भी निगम बिजली आपूर्ति की व्यवस्था नहीं सुधार सका है।
उपभोक्ताओं ने बताया कि 10 जून को चड़वाल के मुख्य बाजार में बिजली के लटकते तार बुलडोजर लेकर जा रहे एक ट्राले से उलझ गए। तब गनीमत रही कि कोई हादसा नहीं हुआ लेकिन इस बाजार में लटकते बिजली के तार पहले ही इस तरह के हादसे के संकेत दे रहे थे। इसके बावजूद बिजली निगम की ओर से व्यवस्था नहीं सुधारी गई। यह स्थिति चिंताजनक है। इसे सुधारा जाना चाहिए।