जिला प्रशासन और निजी स्कूलों के प्रोत्साहन से जिले की 220 गरीब बेटियों की तकदीर बदलेगी। पहल योजना के तहत निजी स्कूल दो-दो छात्राओं की पढ़ाई का खर्च उठाने को तैयार हो गए हैं।
डीसी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को पात्र मामलों की जांच करने के लिए कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं। महिला साक्षरता के लिए जिला प्रशासन ने मंगलवार को एक और कदम बढ़ा दिया।
इसके तहत गरीबी रेखा से नीचे बसर कर रहे परिवारों की बेटियों को चिह्नित कर निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा, ड्रेस और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इस संबंध में मंगलवार को निजी स्कूल एसोसिएशन के सदस्यों के साथ जिला प्रशासन के अधिकारियों की बैठक हुई।
इसमें डीसी रमेश कुमार ने निजी स्कूल प्रबंधकों से जिले के प्रत्येक स्कूल से दो बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाने में सहयोग मांगा। इस पर एसोसिएशन ने हामी भरी दी। एसोसिएशन के अध्यक्ष गंदर्भ सिंह काटल ने कहा कि जिला प्रशासन की इस पहल का वह स्वागत करते हैं। वह इसके लिए तैयार हैं और पूरा सहयोग करेंगे।
डीसी ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को पहल योजना के तहत जिले में फ्लैगशिप कार्यक्रम के रूप में चलाया जा रहा है। प्रोत्साहन से जिले की 220 गरीब बच्चियों को निशुल्क शिक्षा का लाभ देने की योजना है।
इस पहल से महिला साक्षरता दर में सुधार होने के साथ-साथ बेटियों के प्रति समाज का नजरिया बदलेगा। प्रत्येक निजी स्कूल से अपील की गई है कि एक बेटी को प्राथमिक शिक्षा स्तर पर और एक बेटी को सीनियर या सीनियर सेकेंडरी स्तर पर यह सुविधा दी जाए।