शहर में पार्किंग व्यवस्था एक बार फिर पटरी से उतर गई है। जिला प्रशासन द्वारा दल बल के साथ हार्ट आफ सिटी यानी मुखर्जी चौक और अन्य चौक चौराहों से अवैध पार्किंग हटाने का कार्य करीब डेढ़ साल पहले किया गया था लेकिन उसके बाद एक बार फिर हालात वैसे ही बन गए हैं।
चौक चौराहों की बात तो अलग जिला सचिवालय के सामने ही अवैध पार्किंग का नमूना दिख जाता है। पिछली बार जब अवैध पार्किंग हटाई गई तो नगर परिषद को स्थिति बनाए रखने का जिम्मा सौंपा गया था लेकिन नगर परिषद ने कोई कार्रवाई नहीं की।
ऐसे में अब हालात ऐसे हैं कि चौक तो सिकुडे़ हैं हीं मार्ग की चौड़ाई भी कालेज, जिला सचिवालय और अन्य सरकारी दफ्तरों के सामने कम हो गई है।
इसकी वजह से हादसों की आशंका बढ़ी है। उल्लेखनीय है कि नगर परिषद को इस बात की सख्त हिदायतें हैं कि वह पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर किसी समय अवैध पार्किंग के लिए अभियान चलाकर वाहनों को सीज करवा सकता है लेकिन अब तक छिटपुट अभियानों के अलावा बड़े स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसके कारण जहां अवैध पार्किंग ने जोर पकड़ा तो फुटपाथ पर भी निर्माण सामग्री को कई दिनों तक पड़ा रहने दिया जाता है।
उधर कार्रवाई का डर न होने के कारण मार्ग के बीच में वाहनों को खड़ा किया जा रहा है और परिषद चुप बैठा है।